24.8.13

सब मिथ्या... सब माया... सब बकवास/गल्प....


बालक जो तू देख रहा है सब मिथ्या... जो पढ़ रहा है वो सब माया. जो सुनता है – वो सब बकवास/गल्प कथा माफिक. इन तुच्छ भौतिक पदार्थों में मन नहीं लगा. ओये पुतर जी कंट्रोल करना सीख.  घर की औरतों से सीख जो टी वी के सीरियल देख उसके पात्रों को तुरंत भुला चूल्हे पर दाल की पतीली चड़ा देती हैं. तू टी वी के सीरियल देखना सीख. उसके बाद मनन कर कि खलनायक ने नायक के खिलाफ जो भी साज़िश रची, तेरे बाप का कुछ नहीं गया. उसके बाद खाना पीना नहाना धोना, दारु सुट्टा सब कुछ मिला ही न. इन सीरियल को देखने से तू दुनियादारी भी सीख जाएगा. कुछ दिन या महिना-एक ख़बरों से छुटकारा पा कर एकता कपूर टाईप सीरियल पर मन लगा.
तत्पश्चात अन्य ग्यानी पुरुषों की तरह तू भी मानने लगेगा कि यहाँ प्रभु ने एक तमाशा रचा है – भांति भांति के किरदार हैं. उन सब को झेलने के बाद भी खाना मिलेगा और हज़म भी होगा. बिस्तर पर ऐसे किरदारों को ले कर अपनी नींद चौपट करने की जरूरत नहीं है.

धूमिल याद आये :
हर तरफ धुआं है  - हर तरफ कुहासा है
जो दांतों और दलदलों का दलाल है
वही देशभक्त है
अंधकार में सुरक्षित होने का नाम है- तटस्थता।
यहां कायरता के चेहरे पर सबसे ज्यादा रक्त है
जिसके पास थाली है
हर भूखा आदमी उसके लिए,
सबसे भद्दी गाली है
हर तरफ कुआं है - हर तरफ खाईं है
यहां, सिर्फ, वह आदमी, देश के करीब है
जो या तो मूर्ख है
या फिर गरीब है
 जय राम जी की.

17.8.13

हाल ऐ जिन्दगी

पार्क, गाँव, पहाड़ बारस्ता खेत , मकान दूकान से सरकते सरकते , गूगलिंग कर सर पटकते चश्मे के नम्बर बडवाते, कविता गुनगुनाते, लेख पढ़ते, गीत गाते, औरों से गिरते रूपये को थामते, कागज़ कागज़, प्रेस - प्लेट, स्याही, बिजली, लेबर, मंदी का रुदन करते, पर फिर से गर्दन झटक दो पैग लगा, बाईक उड़ा, बच्चों संग हंसी ठिठोली करते,  लेफ्ट राईट में टाईट होकर पैर पटक पटक जूता घिसाते फिरते,  देर शाम तक किसी भी नशेडी से हँसी ठठा करते ...  देश समाज चिंता से बेखबर, प्याज, आटा नून तेल, शेयर मार्किट, सोना, प्रोपर्टी को अस्सी पर बिठा, सदा मुस्कुराते बतियाते विजेता बन घूमते ......


मखा, आनंद बाबु कभी हमारी गली भी आया करो - रामा शामा कर जाया करो.