21.2.15

Thanks Blogging धन्यवाद ब्लॉग्गिंग.

जिन्दगी का फ़लसफ़ा मोटी मोटी किताबें कालेज में पढ़ाई कर के मिलता है. इतना कॉलेज न जा कर मैंने समझा. बारह दर्जे की पढ़ाई के बाद प्रेस लाइन में कम्पोजिंग की नौकरी के दौरान आने वाली कुछ पुस्तकों की कम्पोजिंग कर के जाना की असल पढ़ाई अभी बाकी है मेरे दोस्त.  कम्पोजिंग करते करते कुछ पढने का शौंक चढ़ा ... और मिस्टर अर्जुन जैसे दोस्त मिले तो बोले - बढ़िया है - पढ़ा करो. नौकरी के बाद अपना कम्पोजिंग यूनिट ... बोले तो सेल्फ एम्प्लाईड और फिर इस इन्टरनेट के व्यापक  जाल में खुद को ढूँढना ... बोले तो जिन्दगी कहाँ मिलेगी ऐ दोस्त.
कुछ ब्लोग्स तक पहुंचा ...
पढने का रस मिलने लगा..
पता नहीं क्यूँ, नीम अँधेरे में कहीं माचिस की तीली चस्ती है तो वो ब्लॉग ही होता है.
देखिये न इसी सप्ताह यु ट्यूब पर कई पंजाबी फ़िल्में देखी .. बोरियत होने से फेसबुक में कुछ कुक करने भी पहुँच जाता पर ... वहाँ जिन्दगी नहीं मिलती.
आज फिर शाम गल्फ करने बैठा तो सोचा कोई बेहतरीन फिल्म देखी जाए. सो गूगल बाबा की शरण में आया और सर्च किया "2013 बेहतरीन फिल्म" कसम से हाथ लगा अकेला चना वाले श्री अजीत सिंह जी का लिंक और  फिल्म का नाम उन्होंने सुझाया ... "LISTEN अमाया"
बढ़िया फिल्म..
बहुत ही बढ़िया.
इस फिल्म के बारे में लिखना बेवकूफी होगी.. समय मिले तो देखिएगा... अरे भाई यहीं... यु ट्यूब पर..
सच्ची, अच्छी फ़िल्में जीना सिखाती हैं...

जय रामजी की.