2.5.16

स्वप्न

न स्वप्न आने बंद होते है,
न स्वप्न कभी पुरे होते .
वो तो बस ...
आपको भगा भगा कर
थका कर 
कहीं ठंडी छाँव में
आपके सुस्ताने का इंतज़ार करते हैं.
ताकि
आपके तरोताजा हो उठने के बाद
पुनः बेताल मानिंद आपकी पीठ कर सवार हो सकें.
और याद दिला सकें...
मंजिलें अभी बाकि है.


अत: स्वप्न अभी और भी हैं.