7 जुल॰ 2012

भारत के सबसे तेज़ ब्लोगर डॉ अनवर जमाल DR. ANWER JAMAL

डॉ अनवर जमाल साहेब, दिसम्बर २००९ से ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं, ये पूर्ण कालीन ब्लोगर हैं, नून आटा दाल चावल सोरी ये सब तो ये खाते नहीं, अंडे चिकन मटन सब इन्हें ब्लॉग्गिंग से ही प्राप्त होता है. रात रात भर जाग कर डॉ साहिब न केवल पोस्ट लिखते/कट पेस्ट करते हैं अपितु कमेंट्स भी करते हैं : इन्ही के शुभ हाथों द्वारा कि-बोर्ड पर पंच “भाई साहब हम भी आ गए हैं जोत जलाने और वह भी रात को 3 बजे । बिना सनकामीटर के ही भाँप लीजिए कि किस ग्रेड की सनक सवार है ?


     जितने भी ब्लोग्स का ये पोस्ट लिख कर पेट भरते हैं आप सुनेगे तो हैरान रह जायेंगे. इनके पुरे ३१ ब्लॉग है. आप को ये जानकार आश्चर्य होगा, परन्तु ये सत्य है. इनकी पूरी कोशिश यही रहती है कि वो सब अपडेट रहे. इनके ब्लॉग हैं : Blog News भारतीय नारी  आर्य भोजन  कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य  Deoband U.P.  Hindi Facebook-हिंदी फ़ेसबुक  अटल सत्य  Mushayera  बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?  ब्लॉग संसद  Hindi Twitter  AHSAS KI PARTEN  प्यारी माँ  Hindi Blogging Guide  Comment's garden •Tibbe Nabvi  Ancient Ayurveda  Alrisala Hindi  औरत की हक़ीक़त  कुरआन से  Ved Quran  मन की दुनिया  Blue Films  इसलाम धर्म  Tech. Aggregator  Hindi Bloggers Forum International (HBFI)   बाइबिल के रहस्य  धार्मिक साहित्य  Reader Blogs - Navbharat Times - India Times  Blog Sansaar ब्लॉग संसार  सत्यार्थ प्रकाश

      अब मज़े की बात देखिये भारतीय नारी के बाद आर्य भोजन जैसे ब्लॉग में लिखते हैं तो वहीँ ब्लू फिल्म के नाम से भी ब्लॉग बना रखा है.... वहीँ प्यारी माँ भी है. उसके बाद ये बड़ा ब्लोगर बनने के गुण भी सिखा रहे हैं, फिर कभी आयुर्वेद – मुशायरा, टेक्नीकल गाइड से होते हए औरत की हकीकत तक आ पहुँचते है. बाकि बाइबल से लेकर सत्यार्थ परकाश तक सभी धार्मिक साहित्य का ये वर्णन करने से नहीं चूक रहे.

    कमाल है – ये इंसान नहीं चलते फिरते एन्सैक्लोपेडिया है  - जैसे पुराने समय में चच्चा कमरूदीन हुआ करते थे, बाबा उनके बुद्दिचंद थे, मुगलों के शासन का अंतिम दौर था. कुछ लोग इनाम और कुछ डर जोर जबरदस्ती से मुसलमान हो रहे थे. समय के हिसाब से बुद्दिचंद आर्थिक/सामाजिक हैसियत बिरादरी में कमतर थे. अत: कोतवाली पेश होकर सदर से बोले की मैं कुटुंब के साथ धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हूँ, कुछ आर्थिक लाभ चाहिए.... धर्म जाते ही बुद्दिचंद झोली अशर्फियों से भर गयी.

    इन्ही बुद्दिचंद के वंशज चच्चा कमरूदीन शाम को बरगद के पेड के नीचे बैठकी लगाते – दो पीड़ी पुराने संस्कार अभी भी थे, बालकों को रामायण कथा-पुराण सुनाते और उन सभी की अच्छी शिक्षाएं अंत में इस्लाम मैं किसी न किसी बहाने समाहित कर लेते.

     समय बदलता है, आज बरगद के नीचे बैठकी नहीं होती. पर चच्चा कमरूदीन जैसे कई लोग है ... अपने डॉ जमाल आज भी उसी परम्परा को जिन्दा रखे हुए हैं. ये मैं नहीं कह रहा वो अपनी प्रोफाइल में खुद कहते है.

    ऐसा नहीं है कि डॉ अनवर जमाल मात्र सनातन धर्म को नीचा अपने नॉन सेन्स कमेंट्स द्वारा दिखाते है. जैसे बकरी कि खाल में भडिया होता है , वैसे भी अपनी मानसिकता में लघुकथा लिखने से नहीं चुकते. और मज़े की बात उनको यहाँ भी विवाद चाहिए, अत: पोस्ट का नाम भी विवाद रखते हैं. 
    विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story) : इस लघुकथा में आंतकवादियों को लकड़बग्घों और आम जनता को हिरन के रूप में चित्रित करते हैं.
बूढ़ों ने इत्मीनान से जवाब दिया-बच्चों ये हिरन बहुत बदमाश होते हैं। जब भी पकड़ो तभी विवाद शुरू कर देते हैं। बच्चों ने मुड़कर हिरन की तरफ़ देखा। उसके हाथ पांव अब नहीं हिल रहे थे। विवाद पूरी तरह शांत हो चुका था। बूढ़ा बरगद,  नीम, पीपल और झाड़ियां बस ख़ामोश तमाशाई थे। वे कभी विवाद में नहीं पड़ते।
ये तो हो गया डाक्साब का विवाद अब जरा कोमेंट्स देखिये, अपने ब्लोग्गर साथियों के. वो नहीं समझ पा रहे हैं कि इनका इस पोस्ट का मकसद क्या है. वो बस अपनी हाजरी लगाना चाहते है,  ताकि ब्लॉग्गिंग के डाक्साब इनकी पोस्टों को भी अपने ब्लोगों में शामिल कर इनके लेखन का प्रचार करें. 
     यहीं नहीं, वो  डाक्साब हैं, अत: छाती ठोक कर रक्षा मंत्रालय के आहार विशेषज्ञ (सैनिकों की खुराक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण) की तरफ से सलाह भी देते हैं : रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए उनके आहार को और पौष्टिक बनाने का फैसला किया है। इस कवायद में फील्ड और पीस एरिया में तैनात जवानों को जहाँ अब हर दिन दो अंडे दिए जाएँगे। वहीं नौ हजार फुट और उससे अधिक ऊँचाई पर तैनात जवानों को दिन में एक के बजाए दो अंडे मिलेंगे ।
उसके बाद  डाक्साब आम नागरिक को भी सलाह देते हैं मानो अमरीका जब २ लाईन की वीटो जारी कर्ता है :
इसलिए हर व्यक्ति को प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित मेन्यू अपनाने की जरूरत है। 
    डाक्साब मात्र आहार विशेषज्ञ ही नहीं है अपितु वो तो खानदानी शफाखाना के हकीम की तरह, शुक्राणु बढ़ाने वाला अचूक नुस्ख़ा और पुरुष संतानहीनता तक के नुक्से बताते हैं ... वो भी दर्शन/अध्यात्म शास्त्र मिला कर. J और तो और उनके बताए नुस्ख़े का इस्तेमाल करने के बाद एक मर्द 100 औरतों को चरम सुख की प्राप्ति करा सकता है ये दावा है उनका.
     वैसे इन्सानियत धर्म दर्शन डाक्टरी जसे विषयों/शौंक के इतर डाक्साब  अधिकतर प्यार, वासना, औरत, हया, रेप, बलात्कार, पुरुष और स्त्री, नंगी लड़कियों जैसे शब्दों पर अधिक ध्यान देते हैं, और जहाँ से भी इस विषयक कोई खबर इनको मिलती है वो अपने उक्त ब्लोगों में से किसी एक पर चस्पा कर देते हैं.
    इनके विषय में वरिष्ट ब्लोगर का कथन हैं : 
अनवर जमाल जी की विद्द्वता को तो मानना पड़ेगा तथा उनका बहुत धन्यवाद जो उन्होंने वेदों की महानता के बारे में आम हिन्दू जनता को याद दिलाया. लेकिन दुःख तभी होता है जब वो एकपक्षीय तर्क रखते हैं. वे हिन्दू धर्मग्रंथों की उन व्याख्याओं अनुवादों को आधार मान के चलते हैं जिसे आम प्रबुद्ध हिन्दू जनता स्वीकार नहीं करती है. किन्तु धर्म ग्रन्थ कुरान के सम्बन्ध में एक भी आक्षेप सुनने को तैयार नहीं. हम तो खुल के मानते हैं की हाँ! हमारे धर्म ग्रंथों में बहुत सी गलत अवैज्ञानिक बाते बाद के समय में प्रविष्ट की गयीं. उन्ही बातों को आधार बना के आप कुरान को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं . क्या इन्होने कभी गलती स्वीकार की? ये कुरान की गलत बातों का विरोध कर भी नहीं सकते. क्यों की मुस्लिम धर्म इसकी आजादी नहीं देता . इसकी परिणिति हम मुस्लिम देशों में इश निंदा के कानून के रूप में देख सकते हैं. अपने कुतर्कों के द्वारा मांसाहार को जायज ठहराना बहुत ही क्रूर प्रथा खतना का समर्थन करना ये कहाँ तक उचित है. आज हमारे लिए उचित है की हिन्दू या मुस्लिम धर्म से ऊँचे उठ कर इंसानियत का धर्म अपनाएं. इश्वर उनको सद्बुद्धि दे की वो अपना ज्ञान उचित दिशा में प्रयोग करें तथा ऐसे ही सुधार जारी रखें .
      कभी भी, कहीं भी ब्लोग्गरों में जरा सी लापरवाही से चूक हो जाये तो  डाक्साब एक गिद्ध माफिक नज़र से पकड़ लेते हैं... आप २०१० से ब्लॉग्गिंग के इतिहास को देखिये ... जहाँ जहाँ भी कोई चूक हुई है, ब्लोग्गरों में असहमति हुई है, कुछ तकरार/मनमुटाव हुआ है, डाक्साब तुरंत बंदर की तरह आधी रोटी लिए चपत हो जाते हैं. और बाकि लोग हाथ मलते रह जाते हैं, इस अब मैं आता हूँ, इस पोस्ट लेखन के औचित्य पर.
    कुछ महीने पहले एक महिला ब्लोग्गर ने भावावेश में आ, पति-पत्नी के सम्बन्धों पर  कविताई रच ली. हिंदी ब्लॉग्गिंग है, जहाँ अभी हम लोग दिमाग से पूर्ण खुले हुए नहीं हैं. अत: उस कविता पर विवाद हो गया, महिला ब्लोगर को कहीं लगा कि पोस्ट सही नहीं है अत: उन्होंने वो पोस्ट अपने ब्लॉग से डिलीट कर दी. पर डाक्साब कहाँ मानने वाले थे, आधी रोटी लिए ये चम्पत हो गए. और आधी अधूरी पोस्ट को “सम्भोग रहस्य” जैसे शब्द के साथ अपने ब्लॉग पर लगा दिया – उस महिला के फोटू के साथ. मुझे बहुत दुःख हुआ. उस महिला जो की इनके ब्लॉग की मेम्बर भी थी, उसने बहुत रिकुएस्ट की पर डाक्साब मौका कहाँ चुकने वाले थे. अत: न वो पोस्ट हटाई और न ही उनका चित्र.
    अभी कुछ दिनों पहले फिर एक और महिला ब्लोग्गर के कमेंट्स को कांट-छांट कर इन्होने एक पोस्ट तैयार की – जिसका नाम दिया गया “धर्म के नाम पर 'सेक्सका खेल” और उस पोस्ट के साथ उस महिला ब्लोग्गर का भी चित्र छाप दिया.
उफ़; हद्द हो गयी; 
उसके बाद देखिये, LIKE और Popular Posts गेजेट के अंतर्गत वो दोनों पोस्टें तुरंत टॉप पर लगा दी गयी.
      मैंने देखा तो मुझे बहुत दुःख हुआ कि ये बन्दा यहाँ ‘ब्लॉग्गिंग’ में किस लिए है. क्या किसी भी सभ्रांत घर की महिला के चित्र के साथ कुछ भी अंटशंट लिखता रहे, मैंने कई बार उसको टीप दी, प्राथना की, कि आप उक्त दोनों पोस्ट अपने ब्लॉग से हटा लीजिए पर डाक्साब ईमान के पक्के ... उन्होंने वो पोस्ट हटाने से मना कर दिया. बात घुमानी जानते है – अत: तर्क कर रुख मोड देते हैं. खाली हैं. खाली दिमाग – शैतान का घर.
    अब भी देखता हूँ, कई सामुयीक ब्लॉग पर जहाँ उसकी बकवास जारी रहती है वहाँ महिला पदाधिकारी बनी हुई है, और कई नाईस – सुंदर – सार्थक पोस्ट लिख कर खुश हो रही है. क्या अगला नम्बर उनका नहीं लग सकता. हम लोग इंसान है गलती किसी से भी हो सकती है. इसका मतलब ये नहीं कि उस गलती का आप परचा छाप कर वितरित करते रहे.
क्या किया जाए?
अच्छी बात पर अमल करना और अच्छे लोगों को इक्कठा करना बहुत मुश्किल है. फिर भी कोशिश की जा सकती है,
जैसे 
डॉ अनवर जमाल के किसी भी यहाँ कमेंट्स न करें न अपने ब्लॉग पर उसे कमेंट्स करने दें. न ही उनको किसी ब्लॉग/पोस्ट की चर्चा अपने मंच पर करेंन ही उनको अनुमति दें कि वो आपकी पोस्ट का लिंक अपने ब्लॉग पर लगाये,
मेरे ख्याल से हम लोगों के पास और कोई रास्ता नहीं है. मात्र उनको ब्लॉग्गिंग से बायकाट करने के. वैसे जो यक्ष प्रशन खड़ा होगा कि तुम कौन होते हो, ऐसा फैसला करने वाले. तो इस विषय में बस इतना ही कहूँगा कि ऐसे लोग ब्लॉग्गिंग में एक विकृत मानसिकता पैदा कर रहे हैं – कल हो सकता है अपना कोई सगा/सगी ब्लॉग्गिंग में आकार इन लोगो के चक्रव्यूह में फंस गई तो इस वक्त को याद करेंगे, उनको पहले रोकना था,
अनुराग जी के शब्दों में : दुःख की बात तो यही है कि ऐसी कुत्सित हरकतें लगातार करते रहने वालों के भी न केवल नियमित पाठक (और "बहुत बढिया" कहने वाले) मौजूद हैं बल्कि पीड़ितों और उनके नज़दीकी मित्रों में से ही कई ऐसे तथाकथित गुटों के प्रमोटर्ससदस्यअध्यक्ष आदि बनकर अपने चित्र वहाँ सुशोभित करवाते रहे हैं। इंसान पहचानने की थोड़ी समझ तो हममें विकसित होनी ही चाहिये। बॉयकॉट का इंतज़ार तब तक क्यों जब तक हमारा व्यक्तिगत अपमान न हुआ हो। वह अकेला नहीं हैउसके जैसे भरे पड़े हैंउनकी पहचान होती रहे। कीचड़ साफ़ न भी हो तो उसमें सनने से बचने का प्रयास तो होता रहे।  

जय राम जी की.

60 टिप्‍पणियां:

  1. डाक्साब, पोस्ट लिख कर, कल से १० दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ, कमेंट्स बॉक्स खुला छोड़ कर .... जो मन में आये कमेंट्स दीजिए, और मैं पब्लिश भी करूँगा, इतना कायर नहीं हूँ, कि कभी टीप छापूँ, और कभी डिलीट कर दूं,

    बाकि सभ्य रहे, आकार जवाब दूँगा. जय राम जी की.

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  2. डॉक्टर अनवर जमाल का बहुत बडिया विश्लेक्षण दीपक जी

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  3. शुरू शुरू में, मै इस्लाम को निकट से जानने के लिए इन डॉक्टर जमाल साहब के ब्लॉग्स पर जाया करता था, वाजिब भी था क्योंकि ये इस्लाम के झंडाबरदार ब्लॉगर प्रचारक जो है। इनके विचारों को देखकर इस्लाम के बारे में सबकुछ साफ साफ हो गया। आप तो इनके ब्लॉग पर न जाने का कहते है पर मैं को कहता हूँ जिन्हें सही मायनों में इस्लाम को जानना हो उन्हें अवश्य इनके वाणी, व्यवहार,वर्ताव को देखकर समझ लेना चाहिए। आपने जो पोस्ट में उल्लेख किए है और जो ब्लॉग की खबरों पर सामग्री है यही इनका व्यवहार और वर्ताव है। निश्चित ही ये गुण इनमें इस्लाम की देन है।
    सैन्य के आहार पर फरमान जारी करके तो इन्होंने सैन्य के आहार मामलों में भ्रम फैलाने का कार्य किया था।
    सैक्स को तो ये लोग अल्लाह की इबादत मानते है और नतीजों को इबादतगार्। सैक्स पर नुख्खे और सैक्स पर लेखन या इधर उधर का प्रकाशन इनका प्रिय शगल है।
    महिलाओं का सम्मान इनके व्यवहार वर्तन में ही नहीं है वर्तमान प्रकरण इसका उदाहरण है।

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  4. मेरी ओर से हार्दिक श्रद्धांजलि

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    1. तेरहवीं की भोज कब है? मेरे ख़याल से तब तक दीपक बाबा भी आ जायेंगे श्राद्ध कर्म कराने के लिए, ना?

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    2. @तेरहवीं को न्योता ना आओ .... घणी बेर हो लई

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  5. दीपक जी, कल मैने अनवर साहब के यहां कमेंट किया था, प्रकाशित नहीं किया गया :( मेरी गलती ये है कि मैने उस कमेंट को copy नहीं किया था, सो सेव करने का सवाल ही नहीं. लेकिन अनवर साहब जो अभद्रता कर रहे हैं, उसका पुरज़ोर विरोध किया जाना चाहिये.

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  6. मैंने शुरू से ही सिद्धांत बना रखा है कि धार्मिक कट्टरता से संबंधित किसी भी ब्लॉगपोस्ट पर कभी न जाना न पढना न टीपना सो एक हद तक बचे ही हुए हैं । पहले भी कहता रहा हूं कि हिंदी ब्लॉगिंग में सक्रिय कुछ लोग जब ऐसी कोई हरकत किसी मंशा से करते हैं तो सिर्फ़ इसलिए बचे रह जाते हैं क्योंकि उनका निशाना बनने वाले हमारे आप जैसे ही लोग हैं । सिर्फ़ एक कानूनी शिकायत , बहुत सारी समस्याओं का हल निकाल देगी और देर सवेर ये हो ही जाएगा , आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी । वैसे भी दीपक भाई , हिंदी ब्लॉगिंग भी कूडा कचरा से अपवाद तो नहीं है , यही लगता है अब । उपाय ये भी ठीक है कि पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाए ऐसे लोगों को ।

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  7. आज ही नैट उपलब्ध हुआ है, सारी कहानी देख-समझ लें ज़रा|

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  8. its my request those who are commenting on that blog against that post please submit your comments only in english as it would be easier for the system to understand the problem and take a action against the blog

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  9. कुछ समय पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी...लिंक दे रही हूँ..
    वक्त निकाल कर आप पढ़ें...आपकी पोस्ट का समर्थन करती हूँ..
    http://swapnamanjusha.blogspot.ca/2012/04/blog-post_1851.html

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  10. We oppose what those people are doing this. but do not know which post we should comment on. I register my opposition here and thank deepak ji for this.

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  11. हमने तो शुरु से ही यही रास्ता अपना रखा है।

    प्रणाम

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  12. इसका एक सीधा सा आसान उपाय , १.पहली बात खुद के = लेखन में भी इसका नाम न लीजिए, २ दूसरी बात इसके ब्लॉग पे मत जाईये , यदि जाईये तो चुपचाप पढ़िए और इसका काउंटर पार्ट तैयार कर अपने ब्लॉग पे लगाईये येलोग खुदी रोते फिरेंगे फिर, उदाहरणार्थ , एक ब्लोगेर ने प्रतापगढ़ के बारे में लिखा की वहाँ भी मोदी राज, मैंने उसे वहाँ कुछ नहीं कहा, उसका काउंटर तैयार कर दिया " बालात्कारी को मुआवजा" बस तड़प गए महाशय लोग, एक भाई तो मेरे इस लेख का ले के घूमते भी फिर रहे हैं,रोते रोते .... वैसे अभी मै १९२० की प्रकाशित एक पुस्तक "रंगीला रसूल" टाइप करने में व्यस्त हू जिसे मेरी मदद एक दो और भाई कर रहें है , आशा है आपलोगों को पसंद आएगा...

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  13. हमने तो शुरु से ही यही रास्ता अपना रखा है।

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  14. दूसरों को अपमानित करने के लिए ये इसी तरह के तरीके अपनाते हैं.और अक्सर इनका विवाद चाहे किसी भी बात पर किसीके साथ भी हो हिंदू महिलाओं को बीच में लाना और उन्हें अपमानित करना नहीं भूलते और ये केवल एक दो महिलाओं को अपमानित करने तक ही सीमित नहीं रहते बल्कि एक पूरे बडे समूह के प्रति ही हमलावर होते हैं लेकिन ये बहुत शातिर हैं सीधे सीधे कुछ कहने की बजाए घुमा फिराकर बात करते है ताकि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.कुछ दिनों पहले इसीलिए मैंने इनका विरोध किया था कि आप अपने झगडों के बीच में महिलाओं को न लाया करें.लेकिन इनकी खुजली है कि मिटती ही नहीं.इस पोस्ट को देखिए कि कैसी चालाकी से हिंदू महिलाओं के बारे में घृणास्पद बातें कही गई है यहाँ तक कि उनके चरित्र पर भी निशाना लगाया गया है
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2012/01/love-jihad.html
    तरस आता है उन लोगों पर जो कहते है इस मामले को धर्म से न जोडा जाए.एम.एफ. हुसैन के बचाव में भी यही तर्क दिए जा रहे थे जबकि हुसैन ने केवल हिंदू आस्था के केन्द्रों को ही चुन चुनकर घायल किया था लेकिन मुस्लिम महिलाओं को हमेशा पूरी मर्यादा के साथ चित्रित किया बल्कि ऐसे चित्र को well clad Muslim woman जैसे शीर्षक भी दिया.यही हुसैन वाली मानसिकता अनवर जमाल की भी है इनके निशाने पर भी हिंदू महिलाएँ ही रहती हैं.

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    1. @ मुस्लिम महिलाओं को हमेशा पूरी मर्यादा के साथ चित्रित किया बल्कि ऐसे चित्र को well clad Muslim woman जैसे शीर्षक भी दिया.

      क्या हिंदू बुद्धिजीवी कभी मुस्लिम पोषक धर्मनिरपेक्ष अंधे कुएं से बाहर निकलेंगे.

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  15. भैया, जब तक अपने धर्म के प्रति समर्पित नहीं होंगे, ऐसे ही चलता रहेगा. धर्मनिरपेक्षता एक तरफा नहीं होती. जो कांटे चुभायेगा, उसके कील चुभानी पड़ेगी.

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    1. जो कांटे चुभायेगा, उसके कील चुभानी पड़ेगी.

      jai baba banaras...

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  16. दीपक जी आपकी पोस्ट के शीर्षक में वर्तनी की ग़लती है, कृपया सुधार लीजिये..
    'भारत के सबसे तेज़ ब्लोगर' की जगह
    'भारत के सबसे निस्तेज ब्लोगर' होना चाहिए था..

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  17. क्या कहे बाबा जी चलिये कुछ लिखना है तो इतिहास की बाते करता हु और कुछ ज्ञान नहीं

    1 जब पाकिस्तानी भारत से युद्ध मे नहीं जीत पाये तो उन्होने जम्मू और कश्मीर पर कबयलियों के भेष मे आक्रमण किया ॥ तब से आमने सामने का वार नहीं किया... करते कैसे अगर एक हो कर सनातनी लघुशंका कर दे तो बाढ़ आ जाएगी पूरे पाकिस्तान मे ... फिर भी सुवर की जात पाकिस्तानी माने नहीं तो एक दिन सनक गयी एक महिला की खोपड़ी और लाहोर मे तिरंगा और बांग्लादेश अलग॥ फिर भी हरामखोर नहीं माने भारत मे अजेंट भेजते रहते हैं जिनको जुगाड़ से भारत की नागरिकता मिल जाती है और वो बम फोड़ते हैं यहा ॥ बम कई प्रकार के होते हैं जैसे कुत्सित मानसिकता का बौद्धिक बम,सेना वाला इत्यादि इत्यादि ॥मगर परिणाम है हिंदुस्तान का नुकसान करना ॥

    2एक कहावत: जिस थाली मे खाते हैं उसमे छेद करने वाले के पिता का नाम पता लगाना मुश्किल कार्य होता है॥

    3 सुना है अबू जिंदाल के पास पेट्रो डालर से पैसे भेजे जाते थे ताकि वो पूर्णकालिक रूप से अपनी गतिविधि भारत मे चला सके ॥ मतलब भारत मे रहकर भारत की खाये और पाकिस्तान की गा सके ॥

    4 आबु जिंदाल जैसे लोगो ने पवित्र पाक इस्लाम धर्म को बदनाम कर रखा है जो नीच हिंदुस्थान मे रहकर भी पाकिस्तान के लिए काम करते हैं...

    बाबा जी आप की पोस्ट के बारे मे कोई टिप्पणी नहीं करनी मुझे क्यूकी आप से कुछ नाराजगी है आय था तो कुछ लिखना था जो टीवी मे देखा आज कल लिख दिया...

    जय श्री राम

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  18. मेरी सचिव ने भी एक पोस्ट लिख दी है
    http://mosamkaun.blogspot.in/2012/07/blog-post.html

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    उत्तर
    1. एक से भले दो, ई सही रणनीति है। चल पड़े तो नाम आपका, रपटे तो बदनाम सचिव का। अब आप भी अकेला ब्लॉगर से दुकेला ब्लॉगर हो गये का?

      हटाएं
  19. लगता है ब्लागिंग मे दुबारा आना पड़ेगा...

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  20. ठीक है -गहराई में उतरने में लगा हूँ -पर ऐसे लोगों को इतना क्यों तूल देना -मैं तो कभी नहीं जाता वहां - एक पक्का शातिर बदमाश आदमी है -**** दूसरा ,*** तीसरा बस सबके अंदाजे बयां अलग अलग है ?

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  21. मैं ने विरोध दर्ज कर दिया है और गुगल प्लस से रिमुब कर दिया तथा कमेंट को मोडरेट नहीं किया, गलत का विरोध होना चाहिए,,,

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  22. यह गुट अपनी विचारधारा की बदियां छुपाने के लिए दूसरों की परित्यक्त बदियां कुरेद कर दिखाने की दुर्भावना पालते है। इनके लिए अपनी बदियां तो ‘अन्तिम’ ‘अपरिवर्तनीय’ हलाल, और दूसरों के सुधार विकास भी हराम और विशेष में निंदाप्रद। मूर्ख हमेशा अपने दुष्कृत्य छुपाने के लिए दूसरों के सत्कर्मों का निंदा प्रचार करते है।

    अन्य विचारधाराओं के तिल जैसे विकारों को ताड़ स्वरूप प्रस्तुत कर यह दर्शाने की धूर्तता करते है कि उनकी विचारधारा के पास ईलाज है।

    यह सच्चाई है कि जो लोग दूसरों की परित्यक्त गन्दगी को कुरेद कर गंध उभारने/दिखाने का दुष्कर्म करते है वे अपनी गन्दगी में मदहोश रहते हुए पराई गन्दगी से भी सनते है।

    यह गुट मांस मदिरा मैथुन आदि पांच मकारों के उपासक है, सैक्स को इबादत मानते है, लोगो को काम-भावनाओं का प्रलोभन देकर अपनी काम प्रमुख अवधारणा वाले मत की और आकर्षित करते है इसी ध्येय की पूर्ति के लिए आलेखों में अश्लील शब्दों का संकलन करते है। क्वालीटी की जगह क्वांटिटी ही मक़सद है। तन को तो आवरण देने वाले ऐसे लोग शब्दों के बडे नंगे होते है। नारी सम्मान इनके शब्दकोष में ही नहीं, इसीलिए सज्जनता और मर्यादा का भान नहीं, जैसे मूर्ख की सारी बुद्धि घुट्ने में होती है वैसे ही इनका सारा विवेक दाढ़ी में और मर्यादा सारी लबादे तक ही सीमित होती है।

    वे भलिभांति जानते है कि अश्लील व गंदे शब्दों और महिलाओं के चित्रों से लोग आएंगे, मनचले लोगों को अपने ब्लॉगों पर लाकर अपने अन्तिम के नाम चढ़ाकर ऐसी शिक्षा का पोषण किया जा सकता है। और उन्हें सहज ही भ्रमित करना आसान हो सकेगा।

    यह सक्रियता दुराग्रहों से युक्त मंशा का योजनाबद्ध षड़यंत्र है। इन दुर्भावनाओं को इग्नोर करना मामले का स्थाई हल नहीं है, आप इनके ब्लॉग्स पर नहीं जाएंगे या इनका नामोल्लेख भी नहीं करेंगे तब भी ये समाचारों के नाम पर, विवेचना के नाम पर, चर्चा के नाम पर, पोस्ट टिप्पणी चित्र आदि किसी को भी उलझलूल आधार देकर आपको विवाद में खींच लाएंगे। यह इनका कुख्याती का कुत्सित तरीका है।
    @ तेज़ ?
    आज़ाब की आग उससे भी तेज होती है।

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  23. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

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  24. ashutosh ji - apka comment deepak baaba ji ne nahi, "google baba" ji ne udaya hai - oopar doosre comment me ve likh gaye hain ki 10 din baahar hain :

    डाक्साब, पोस्ट लिख कर, कल से १० दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ, कमेंट्स बॉक्स खुला छोड़ कर .... जो मन में आये कमेंट्स दीजिए, और मैं पब्लिश भी करूँगा, इतना कायर नहीं हूँ, कि कभी टीप छापूँ, और कभी डिलीट कर दूं,

    बाकि सभ्य रहे, आकार जवाब दूँगा. जय राम जी की.

    so - it may be in spam, will be visible only after the blog admin returns.

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  25. तहलका मचा दिया आपने ... जय हो भोले नाथ की ...

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  26. कुछ सूचनाएं पाकर मैंने इस प्रसंग को देखा। अनवर जमाल से संबद्ध कुछ बातें साफ हैं:

    १- उनका पूर्ण प्रयास इसलाम के अंधसमर्थन/अंधप्रचार का है, इसलिये वह कुतर्क की हद तक जाकर इसे करना अपना धार्मिक कार्य समझते हैं। मैं व्यक्तिगत तौर पर ’धर्म’ को बेकार की चीज समझता हूं इसलिये भगवा-झंडा हो या इसलामी-झंडी दोनों को खराब मानता हूं।

    २- अनवर जमाल सेक्स या किसी भी बोल्ड विषय पर कुछ भी खुलकर लिखें, समस्या तब है जब उनका एप्रोच १४०० साल पुरानी किताब से निर्देशित होकर बंददिमागी और बर्बरियत से भरा होता है। ये दिन-रात मजहबी खुराफात करते हैं, इसलिये ये सारे बोल्ड विषयों के साथ अन्याय करते हैं। इन विषयों की आड़ से व्यक्तिगत हमला करते हैं। इनका अंतिम निष्कर्ष यही होता है कि सबसे मुक्ति इसलाम में है। इस बंददिमागी से भला कोई किसी बोल्ड विषय पर कैसे लिख सकता है। जाहिर सी बात है कि ये बोल्डनेस के नाम पर फरेब करते हैं। कई बार घटिया बातें लिखते हैं।

    ब्लाग-जगत को चाहिये कि इन्हें समझे और इनके कूढ़मगज दिमाग का वैज्ञानिक चेतना से दे। इन्हें फिजूल का भाव न दे। ये आत्मसमीक्षा करें और अपनी मजहबी दुकान की औकात समझें।

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    1. @ कुछ सूचनाएं पाकर मैंने इ

      blog-jagat ke 31-manjali(blog) en-tila ka poora itihas-bhoogal bas itti si hai....

      pranam.

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    2. अनवर जमाल सेक्स या किसी भी बोल्ड विषय पर कुछ भी खुलकर लिखें, समस्या तब है जब उनका एप्रोच १४०० साल पुरानी किताब से निर्देशित होकर बंददिमागी और बर्बरियत से भरा होता है। ये दिन-रात मजहबी खुराफात करते हैं, इसलिये ये सारे बोल्ड विषयों के साथ अन्याय करते हैं। इन विषयों की आड़ से व्यक्तिगत हमला करते हैं। इनका अंतिम निष्कर्ष यही होता है कि सबसे मुक्ति इसलाम में है। इस बंददिमागी से भला कोई किसी बोल्ड विषय पर कैसे लिख सकता है। जाहिर सी बात है कि ये बोल्डनेस के नाम पर फरेब करते हैं। कई बार घटिया बातें लिखते हैं।

      *कूढ़मगज दिमाग का *जवाब वैज्ञानिक चेतना से दे।

      अमरेन्द्र जी, आपने सही पकड़ा...

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  27. **कूढ़मगज दिमाग का *जवाब वैज्ञानिक चेतना से दे।

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  28. देखियेगा, पूरी टीप स्पैम में हो शायद..

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  29. पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था के वेतन भोगी

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  30. ये सब रोटी कैसे खाते हैं

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  31. जी हुजुर, बिलकुल सहमत. हम तो पहले से ही समझे हुए है.

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  32. डॉ. जमाल के एक दो लेख मैंने पढ़ा है. धर्म पर कुछ लिखा था, अब तो याद नहीं, लेकिन इनके तर्क व्यर्थ लगे तो टिप्पणी किया था. इनके बारें में विस्तार से जानकार दुःख हुआ. वैचारिक भिन्नता तो उचित है लेकिन जानबूझ कर विवाद करना अशोभानीय और अनुचित है. निश्चित ही ऐसी मानसिकता के लोगों की निंदा होनी चाहिए और हमें दूर रहना चाहिए. धन्यवाद.

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  33. दुःख की बात यह है कि भाई-बहनें बहुत देर बाद "इसे" समझ पाए… और अब भी "डॉक्टर" और "साहब" कहकर संबोधित कर रहे हैं…

    जिन्हें इस्लाम को समझने की "खुजली" हो, वे लोग भंडाफ़ोड़ू जी का ब्लॉग क्यों नहीं पढ़ते? भंडाफ़ोड़ू जी का नाम लेते ही कई "तथाकथित उपद्रवी" ब्लॉगर एकदम ठण्डे हो जाते हैं, क्योंकि उनके द्वारा जिस तरह से बाकायदा हदीस और कुरान की आयतों का हिन्दी और अरबी सहित विश्लेषण किया जाता है, वह लाजवाब है…

    ब्लॉग का पता है :- www.bhaandafodu.blogspot.com
    फ़ेसबुक है : https://www.facebook.com/Bhandafodu

    रही बात जमाल या सलीम के ब्लॉग से किनारा करने की… तो मेरे ढेर सारे कमेण्ट्स को डिलीट करके वह खुद भाग खड़ा हुआ है… :)

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    1. एक लिंक ये भी है...


      http://alisinacopy.blogspot.in/

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    2. @और अब भी "डॉक्टर" और "साहब" कहकर संबोधित कर रहे हैं…

      मुझे सोरी गलती हो गयी, हाल के दिनों से इनकी हरकत देख कर लग रहा है कि हकीम साब कहना चाहिए था. और टाइटल में भी :

      विश्व के सबसे नामुराद ब्लोगर डॉ अनवर जमाल

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  34. दीपक भाई, हम इनके ब्लॉग पर जाते ही नहीं हैं। पढने के लिए नेट पर और भी बहुत अच्छी सामग्री हैं जो मन को संतोष देती है। हमारी तरफ़ से तो इनका बहिष्कार ही है।

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  35. यहाँ आए हुए कमेण्ट्स को पढ़ने (पढ़ तो रहे ही होंगे), और लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन की अध्यक्षा डॉ रेखा श्रीवास्तव द्वारा उस ब्लॉग की सदस्यता छोड़ दिए जाने जैसी "सार्वजनिक लताड़" खाने के बावजूद ये सुधरने वाले नहीं हैं, तय जानिए।

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  36. सुधी दीपक बाबा जी .. एवं रचना जी .. !

    मुझे सारे विषय की सूचना आप दोनों के व्यक्तिगत सन्देश के उपरान्त ही प्राप्त हुयी थी। संभवत: ही कभी उनके ब्लाग पर जाना हुआ होगा। किन्तु वहां के परिदृष्य पर मेरी टिप्पणी भी संभवत: प्रकाशित नहीं हुयी .. अस्तु मैंने सवयं को उस अवांछित वातावरण और ब्लाग से अलग कर लिया। इस संबध में आप दोनों का हार्दिक आभारी हूं।

    कृपया सचेतक की इस भूमिका के लिये आप सभी मित्रों का अभिनन्दन .. !

    सादर सप्रेम

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बक बक को समय देने के लिए आभार.
मार्गदर्शन और उत्साह बनाने के लिए टिप्पणी बॉक्स हाज़िर है.