7.7.12

भारत के सबसे तेज़ ब्लोगर डॉ अनवर जमाल DR. ANWER JAMAL

डॉ अनवर जमाल साहेब, दिसम्बर २००९ से ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं, ये पूर्ण कालीन ब्लोगर हैं, नून आटा दाल चावल सोरी ये सब तो ये खाते नहीं, अंडे चिकन मटन सब इन्हें ब्लॉग्गिंग से ही प्राप्त होता है. रात रात भर जाग कर डॉ साहिब न केवल पोस्ट लिखते/कट पेस्ट करते हैं अपितु कमेंट्स भी करते हैं : इन्ही के शुभ हाथों द्वारा कि-बोर्ड पर पंच “भाई साहब हम भी आ गए हैं जोत जलाने और वह भी रात को 3 बजे । बिना सनकामीटर के ही भाँप लीजिए कि किस ग्रेड की सनक सवार है ?


     जितने भी ब्लोग्स का ये पोस्ट लिख कर पेट भरते हैं आप सुनेगे तो हैरान रह जायेंगे. इनके पुरे ३१ ब्लॉग है. आप को ये जानकार आश्चर्य होगा, परन्तु ये सत्य है. इनकी पूरी कोशिश यही रहती है कि वो सब अपडेट रहे. इनके ब्लॉग हैं : Blog News भारतीय नारी  आर्य भोजन  कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य  Deoband U.P.  Hindi Facebook-हिंदी फ़ेसबुक  अटल सत्य  Mushayera  बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?  ब्लॉग संसद  Hindi Twitter  AHSAS KI PARTEN  प्यारी माँ  Hindi Blogging Guide  Comment's garden •Tibbe Nabvi  Ancient Ayurveda  Alrisala Hindi  औरत की हक़ीक़त  कुरआन से  Ved Quran  मन की दुनिया  Blue Films  इसलाम धर्म  Tech. Aggregator  Hindi Bloggers Forum International (HBFI)   बाइबिल के रहस्य  धार्मिक साहित्य  Reader Blogs - Navbharat Times - India Times  Blog Sansaar ब्लॉग संसार  सत्यार्थ प्रकाश

      अब मज़े की बात देखिये भारतीय नारी के बाद आर्य भोजन जैसे ब्लॉग में लिखते हैं तो वहीँ ब्लू फिल्म के नाम से भी ब्लॉग बना रखा है.... वहीँ प्यारी माँ भी है. उसके बाद ये बड़ा ब्लोगर बनने के गुण भी सिखा रहे हैं, फिर कभी आयुर्वेद – मुशायरा, टेक्नीकल गाइड से होते हए औरत की हकीकत तक आ पहुँचते है. बाकि बाइबल से लेकर सत्यार्थ परकाश तक सभी धार्मिक साहित्य का ये वर्णन करने से नहीं चूक रहे.

    कमाल है – ये इंसान नहीं चलते फिरते एन्सैक्लोपेडिया है  - जैसे पुराने समय में चच्चा कमरूदीन हुआ करते थे, बाबा उनके बुद्दिचंद थे, मुगलों के शासन का अंतिम दौर था. कुछ लोग इनाम और कुछ डर जोर जबरदस्ती से मुसलमान हो रहे थे. समय के हिसाब से बुद्दिचंद आर्थिक/सामाजिक हैसियत बिरादरी में कमतर थे. अत: कोतवाली पेश होकर सदर से बोले की मैं कुटुंब के साथ धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हूँ, कुछ आर्थिक लाभ चाहिए.... धर्म जाते ही बुद्दिचंद झोली अशर्फियों से भर गयी.

    इन्ही बुद्दिचंद के वंशज चच्चा कमरूदीन शाम को बरगद के पेड के नीचे बैठकी लगाते – दो पीड़ी पुराने संस्कार अभी भी थे, बालकों को रामायण कथा-पुराण सुनाते और उन सभी की अच्छी शिक्षाएं अंत में इस्लाम मैं किसी न किसी बहाने समाहित कर लेते.

     समय बदलता है, आज बरगद के नीचे बैठकी नहीं होती. पर चच्चा कमरूदीन जैसे कई लोग है ... अपने डॉ जमाल आज भी उसी परम्परा को जिन्दा रखे हुए हैं. ये मैं नहीं कह रहा वो अपनी प्रोफाइल में खुद कहते है.

    ऐसा नहीं है कि डॉ अनवर जमाल मात्र सनातन धर्म को नीचा अपने नॉन सेन्स कमेंट्स द्वारा दिखाते है. जैसे बकरी कि खाल में भडिया होता है , वैसे भी अपनी मानसिकता में लघुकथा लिखने से नहीं चुकते. और मज़े की बात उनको यहाँ भी विवाद चाहिए, अत: पोस्ट का नाम भी विवाद रखते हैं. 
    विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story) : इस लघुकथा में आंतकवादियों को लकड़बग्घों और आम जनता को हिरन के रूप में चित्रित करते हैं.
बूढ़ों ने इत्मीनान से जवाब दिया-बच्चों ये हिरन बहुत बदमाश होते हैं। जब भी पकड़ो तभी विवाद शुरू कर देते हैं। बच्चों ने मुड़कर हिरन की तरफ़ देखा। उसके हाथ पांव अब नहीं हिल रहे थे। विवाद पूरी तरह शांत हो चुका था। बूढ़ा बरगद,  नीम, पीपल और झाड़ियां बस ख़ामोश तमाशाई थे। वे कभी विवाद में नहीं पड़ते।
ये तो हो गया डाक्साब का विवाद अब जरा कोमेंट्स देखिये, अपने ब्लोग्गर साथियों के. वो नहीं समझ पा रहे हैं कि इनका इस पोस्ट का मकसद क्या है. वो बस अपनी हाजरी लगाना चाहते है,  ताकि ब्लॉग्गिंग के डाक्साब इनकी पोस्टों को भी अपने ब्लोगों में शामिल कर इनके लेखन का प्रचार करें. 
     यहीं नहीं, वो  डाक्साब हैं, अत: छाती ठोक कर रक्षा मंत्रालय के आहार विशेषज्ञ (सैनिकों की खुराक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण) की तरफ से सलाह भी देते हैं : रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए उनके आहार को और पौष्टिक बनाने का फैसला किया है। इस कवायद में फील्ड और पीस एरिया में तैनात जवानों को जहाँ अब हर दिन दो अंडे दिए जाएँगे। वहीं नौ हजार फुट और उससे अधिक ऊँचाई पर तैनात जवानों को दिन में एक के बजाए दो अंडे मिलेंगे ।
उसके बाद  डाक्साब आम नागरिक को भी सलाह देते हैं मानो अमरीका जब २ लाईन की वीटो जारी कर्ता है :
इसलिए हर व्यक्ति को प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित मेन्यू अपनाने की जरूरत है। 
    डाक्साब मात्र आहार विशेषज्ञ ही नहीं है अपितु वो तो खानदानी शफाखाना के हकीम की तरह, शुक्राणु बढ़ाने वाला अचूक नुस्ख़ा और पुरुष संतानहीनता तक के नुक्से बताते हैं ... वो भी दर्शन/अध्यात्म शास्त्र मिला कर. J और तो और उनके बताए नुस्ख़े का इस्तेमाल करने के बाद एक मर्द 100 औरतों को चरम सुख की प्राप्ति करा सकता है ये दावा है उनका.
     वैसे इन्सानियत धर्म दर्शन डाक्टरी जसे विषयों/शौंक के इतर डाक्साब  अधिकतर प्यार, वासना, औरत, हया, रेप, बलात्कार, पुरुष और स्त्री, नंगी लड़कियों जैसे शब्दों पर अधिक ध्यान देते हैं, और जहाँ से भी इस विषयक कोई खबर इनको मिलती है वो अपने उक्त ब्लोगों में से किसी एक पर चस्पा कर देते हैं.
    इनके विषय में वरिष्ट ब्लोगर का कथन हैं : 
अनवर जमाल जी की विद्द्वता को तो मानना पड़ेगा तथा उनका बहुत धन्यवाद जो उन्होंने वेदों की महानता के बारे में आम हिन्दू जनता को याद दिलाया. लेकिन दुःख तभी होता है जब वो एकपक्षीय तर्क रखते हैं. वे हिन्दू धर्मग्रंथों की उन व्याख्याओं अनुवादों को आधार मान के चलते हैं जिसे आम प्रबुद्ध हिन्दू जनता स्वीकार नहीं करती है. किन्तु धर्म ग्रन्थ कुरान के सम्बन्ध में एक भी आक्षेप सुनने को तैयार नहीं. हम तो खुल के मानते हैं की हाँ! हमारे धर्म ग्रंथों में बहुत सी गलत अवैज्ञानिक बाते बाद के समय में प्रविष्ट की गयीं. उन्ही बातों को आधार बना के आप कुरान को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं . क्या इन्होने कभी गलती स्वीकार की? ये कुरान की गलत बातों का विरोध कर भी नहीं सकते. क्यों की मुस्लिम धर्म इसकी आजादी नहीं देता . इसकी परिणिति हम मुस्लिम देशों में इश निंदा के कानून के रूप में देख सकते हैं. अपने कुतर्कों के द्वारा मांसाहार को जायज ठहराना बहुत ही क्रूर प्रथा खतना का समर्थन करना ये कहाँ तक उचित है. आज हमारे लिए उचित है की हिन्दू या मुस्लिम धर्म से ऊँचे उठ कर इंसानियत का धर्म अपनाएं. इश्वर उनको सद्बुद्धि दे की वो अपना ज्ञान उचित दिशा में प्रयोग करें तथा ऐसे ही सुधार जारी रखें .
      कभी भी, कहीं भी ब्लोग्गरों में जरा सी लापरवाही से चूक हो जाये तो  डाक्साब एक गिद्ध माफिक नज़र से पकड़ लेते हैं... आप २०१० से ब्लॉग्गिंग के इतिहास को देखिये ... जहाँ जहाँ भी कोई चूक हुई है, ब्लोग्गरों में असहमति हुई है, कुछ तकरार/मनमुटाव हुआ है, डाक्साब तुरंत बंदर की तरह आधी रोटी लिए चपत हो जाते हैं. और बाकि लोग हाथ मलते रह जाते हैं, इस अब मैं आता हूँ, इस पोस्ट लेखन के औचित्य पर.
    कुछ महीने पहले एक महिला ब्लोग्गर ने भावावेश में आ, पति-पत्नी के सम्बन्धों पर  कविताई रच ली. हिंदी ब्लॉग्गिंग है, जहाँ अभी हम लोग दिमाग से पूर्ण खुले हुए नहीं हैं. अत: उस कविता पर विवाद हो गया, महिला ब्लोगर को कहीं लगा कि पोस्ट सही नहीं है अत: उन्होंने वो पोस्ट अपने ब्लॉग से डिलीट कर दी. पर डाक्साब कहाँ मानने वाले थे, आधी रोटी लिए ये चम्पत हो गए. और आधी अधूरी पोस्ट को “सम्भोग रहस्य” जैसे शब्द के साथ अपने ब्लॉग पर लगा दिया – उस महिला के फोटू के साथ. मुझे बहुत दुःख हुआ. उस महिला जो की इनके ब्लॉग की मेम्बर भी थी, उसने बहुत रिकुएस्ट की पर डाक्साब मौका कहाँ चुकने वाले थे. अत: न वो पोस्ट हटाई और न ही उनका चित्र.
    अभी कुछ दिनों पहले फिर एक और महिला ब्लोग्गर के कमेंट्स को कांट-छांट कर इन्होने एक पोस्ट तैयार की – जिसका नाम दिया गया “धर्म के नाम पर 'सेक्सका खेल” और उस पोस्ट के साथ उस महिला ब्लोग्गर का भी चित्र छाप दिया.
उफ़; हद्द हो गयी; 
उसके बाद देखिये, LIKE और Popular Posts गेजेट के अंतर्गत वो दोनों पोस्टें तुरंत टॉप पर लगा दी गयी.
      मैंने देखा तो मुझे बहुत दुःख हुआ कि ये बन्दा यहाँ ‘ब्लॉग्गिंग’ में किस लिए है. क्या किसी भी सभ्रांत घर की महिला के चित्र के साथ कुछ भी अंटशंट लिखता रहे, मैंने कई बार उसको टीप दी, प्राथना की, कि आप उक्त दोनों पोस्ट अपने ब्लॉग से हटा लीजिए पर डाक्साब ईमान के पक्के ... उन्होंने वो पोस्ट हटाने से मना कर दिया. बात घुमानी जानते है – अत: तर्क कर रुख मोड देते हैं. खाली हैं. खाली दिमाग – शैतान का घर.
    अब भी देखता हूँ, कई सामुयीक ब्लॉग पर जहाँ उसकी बकवास जारी रहती है वहाँ महिला पदाधिकारी बनी हुई है, और कई नाईस – सुंदर – सार्थक पोस्ट लिख कर खुश हो रही है. क्या अगला नम्बर उनका नहीं लग सकता. हम लोग इंसान है गलती किसी से भी हो सकती है. इसका मतलब ये नहीं कि उस गलती का आप परचा छाप कर वितरित करते रहे.
क्या किया जाए?
अच्छी बात पर अमल करना और अच्छे लोगों को इक्कठा करना बहुत मुश्किल है. फिर भी कोशिश की जा सकती है,
जैसे 
डॉ अनवर जमाल के किसी भी यहाँ कमेंट्स न करें न अपने ब्लॉग पर उसे कमेंट्स करने दें. न ही उनको किसी ब्लॉग/पोस्ट की चर्चा अपने मंच पर करेंन ही उनको अनुमति दें कि वो आपकी पोस्ट का लिंक अपने ब्लॉग पर लगाये,
मेरे ख्याल से हम लोगों के पास और कोई रास्ता नहीं है. मात्र उनको ब्लॉग्गिंग से बायकाट करने के. वैसे जो यक्ष प्रशन खड़ा होगा कि तुम कौन होते हो, ऐसा फैसला करने वाले. तो इस विषय में बस इतना ही कहूँगा कि ऐसे लोग ब्लॉग्गिंग में एक विकृत मानसिकता पैदा कर रहे हैं – कल हो सकता है अपना कोई सगा/सगी ब्लॉग्गिंग में आकार इन लोगो के चक्रव्यूह में फंस गई तो इस वक्त को याद करेंगे, उनको पहले रोकना था,
अनुराग जी के शब्दों में : दुःख की बात तो यही है कि ऐसी कुत्सित हरकतें लगातार करते रहने वालों के भी न केवल नियमित पाठक (और "बहुत बढिया" कहने वाले) मौजूद हैं बल्कि पीड़ितों और उनके नज़दीकी मित्रों में से ही कई ऐसे तथाकथित गुटों के प्रमोटर्ससदस्यअध्यक्ष आदि बनकर अपने चित्र वहाँ सुशोभित करवाते रहे हैं। इंसान पहचानने की थोड़ी समझ तो हममें विकसित होनी ही चाहिये। बॉयकॉट का इंतज़ार तब तक क्यों जब तक हमारा व्यक्तिगत अपमान न हुआ हो। वह अकेला नहीं हैउसके जैसे भरे पड़े हैंउनकी पहचान होती रहे। कीचड़ साफ़ न भी हो तो उसमें सनने से बचने का प्रयास तो होता रहे।  

जय राम जी की.