25.7.16

रात भर

रात भर मेघ बरसते रहे
रात भर धरती भीगती रही
पेड़ों के पत्ते खामोश रहे, रात भर
और चांदनी भी मुंह चुराती रही
कुछ सुना तुमने..
क्या..
दिल मेरा धडकता रहा 
रात भर.

मैं अपने दिल की सुनाता रहा 
और तुम
वीरान आँखों से बस देखती रही, रात भर.
खामोशी भी कितने इम्तिहान लेती है
ये जाना जागकर - रात भर

रात भर मेरी उल्फतें करवटें बदलती रही..
तुम्हारी वफाएं भी कहाँ सो पायी रात भर.
दोनों के फोन बिजी आते रहे
टेक्स्ट करते रहे दोनों रात भर.

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. my website is mechanical Engineering related and one of best site .i hope you are like my website .one vista and plzz checkout my site thank you, sir.
    http://www.mechanicalzones.com/2018/11/what-is-mechanical-engineering_24.html

    उत्तर देंहटाएं
  3. This is Very very nice article. Everyone should read. Thanks for sharing. Don't miss WORLD'S BEST

    GtCarStuntsGame

    उत्तर देंहटाएं

बक बक को समय देने के लिए आभार.
मार्गदर्शन और उत्साह बनाने के लिए टिप्पणी बॉक्स हाज़िर है.