25.7.16

रात भर

रात भर मेघ बरसते रहे
रात भर धरती भीगती रही
पेड़ों के पत्ते खामोश रहे, रात भर
और चांदनी भी मुंह चुराती रही
कुछ सुना तुमने..
क्या..
दिल मेरा धडकता रहा 
रात भर.

मैं अपने दिल की सुनाता रहा 
और तुम
वीरान आँखों से बस देखती रही, रात भर.
खामोशी भी कितने इम्तिहान लेती है
ये जाना जागकर - रात भर

रात भर मेरी उल्फतें करवटें बदलती रही..
तुम्हारी वफाएं भी कहाँ सो पायी रात भर.
दोनों के फोन बिजी आते रहे
टेक्स्ट करते रहे दोनों रात भर.

2.5.16

स्वप्न

न स्वप्न आने बंद होते है,
न स्वप्न कभी पुरे होते .
वो तो बस ...
आपको भगा भगा कर
थका कर 
कहीं ठंडी छाँव में
आपके सुस्ताने का इंतज़ार करते हैं.
ताकि
आपके तरोताजा हो उठने के बाद
पुनः बेताल मानिंद आपकी पीठ कर सवार हो सकें.
और याद दिला सकें...
मंजिलें अभी बाकि है.


अत: स्वप्न अभी और भी हैं.

22.4.16

शासन करना बहुत आसन है, पर देश हित में कार्य करना बहुत मुश्किल .

आनंद बाबू, बहुत गहरी जड़ें जमी हैं इस देश में कांग्रेस की ... कहाँ तक तुम नष्ट कर पायोगे. कहाँ तक. चाणक्य की तरह अगर एक एक जड़ ही खोदते रहे तो सदियों बीत जायेंगी, और तुम्हारे पास समय नहीं है. फिर भी कांग्रेस दूसरा अवतार लेकर अगले चौराहे पर खड़ी मिलेगी. उसका रंग/रूप/निशान अलग हो सकता पर गहराई से देखोगे तो विचार वही मिलेगा ... देश में मानव समुदाय को को मात्र प्रजा मान और उन शासन करने की प्रवृति लगभग वही मिलेगी. “फूट डालो और शासन करो” का महामंत्र जो उसने अपने पूर्वर्ती विदेशी शासकों से सीखा था वो वही रहेगा.
क्या न्याय व्यवस्था , क्या प्रशसनिक व्यवस्था या फिर कहिये कार्यपालिका और क्या मीडिया (पेड ही सही). पिछले ७० सालों में इस समाज / देश की नसों में महामारी की तरह घर कर चुके हैं. एक ही बात शासन करना बस कांग्रेस को आता है.
क्यों भाई ? इन लोगों को भी शासन करना आता है, नमूना तुम्हारे सामने है:
क्या लालू यादव कहाँ कमजोर है, और उसका वो रंग बदलू छोटका भाई जो कल तक समाजवाद की आड़ में भगवे ध्वज वाहकों के साथ गलबहियां करते करते आज लालकिले पर तिरंगा फेहराने के ख्वाब देखने लगा. जया ललिता शासन कर ही रही है, और उसी क्षेत्र में उसका प्रतिद्वंदी वो चश्मे वाला बाबा, द्रमुक पार्टी वो भी शासन में कहाँ पीछे है. उडीसा में देख लीजिये, कहते हैं आदिवासी राज्य है... पर नायक अंग्रेजीदां .. बोले तो अपने क्षेत्र की भाषा तक नहीं जानता .. पर शासन कर रहा है.
दिल्ली की ही बात कर लिजिय, काम हो या न हो पर शासन तो हो ही रहा है. बेशक कल की पार्टी है, पर कांग्रेस की जगह और उसी के वोट खींच कर आई है.
आप कैसे कह सकते हैं शासन करना मात्र कांग्रेस को ही आता है?
आनंद बाबु, शासन करना एक बात है, और देशहित के लिए काम करना दूसरी बात. ये बहुत बड़ा देश है बाबु, बहुत बड़ा, जितनी संस्कृतियाँ / जितने पंथ और उतने की दावेदार और उतनी ही समस्यायें और मजे की बात ये की ये सब यहाँ पोषित हो विकसित हए हैं, उस लिहाज़ से बोले तो ये महादेश है. यहाँ शासन करना आसान है. डिवाइड & रूल, पूर्वर्ती सिखा गए है. इन सभी के लिए काम करना बहुत मुश्किल.
सत्तर साल बाद भी पानी के लिए कुछ लोग रोज आठ-दस किलोमीटर यात्रा कर रहे हैं. कुछ ऐसे भी जिनकों मात्र दो जून की रोटी मिल जाए – मानो खुदा मिल गया. किसी के पास रोटी तो पर चटनी के जुगाड़ में हलकान है, उसे चटनी चाहिए और जरूर चाहिए. किसी को रोड / बिजली चाहिए.
जिसको रोटी, चिकन दारु, सड़क बिजली सब मिल गयी, उसकी तो समस्याएं और अधिक हो गयी, चीन कैसे बाज़ी मार गया, पाकिस्तान अभी तक जिन्दा क्यों है ? अमेरिका पर राष्ट्रपति आज रात खाने पर क्यों नहीं आया ? आई एस वाले अब तक इतनी हिंसा क्यों कर रहे हैं ?
शासन करना बहुत आसन है, पर देश हित में कार्य करना बहुत मुश्किल ..
तुम नहीं समझोगे आनंद बाबु.

18.2.16

माहौल गर्म है

              देश में माहौल गर्म है. ट्विटर/फेसबुक  पर धड़ाधढ ख़बरें / विचार आ रहे है, जब तक आप सोचो नयी ट्वीट/पोस्ट आ जाती है. सारा दिन गहमागहमी. कन्हैया से लेकर बस्सी तक. कई ब्यान आये और कई पलट गए. मिनट मिनट में यारलोग भी अपडेट होते रहे/करते रहे. 
           तीन दिन की पुलसिया हिरासत के बाद कन्हैया ने राजीनामा लिख दिया है. अब वो "भारत की एकता और अखंडता" पर विश्वास करने लगा है और  दिल्ली पुलिस को इस पर ऐतबार भी हो गया, बोले इसकी जमानत पर इतराज नहीं करेंगे. क्या क्या सौदा हुआ पता नहीं.
           बदलते वक्त के साथ डी. राजा की बेटी का किस्सा खत्म हो गया. उमर खालिद कौन था, कहाँ गया पता नहीं. द्रोपदी घोष किस चिड़िया का नाम था, किस पेड़ पर जा कर बैठी, कुछ नहीं पता. किसे फुर्सत है पता करने की – सो इन दोनों का किसी ने पता नहीं किया. 
           लगता है पत्रकार बिरादरी के बुरे दिन शुरू हो चुके हैं. कोलकत्ता में कुछ पत्रकार पिट गए ... महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी हुई .. कोई बरखा दत या राज देसाई सामने नहीं आया. कौन जात के कुमार साहेब भी कन्नी काट गए. क्यों आते, दीदी का शासन है. और दीदी सेकुलर है. सेकुलर लोग कुछ भी करें. इस बिरादरी को कोई दिक्कत नहीं. 
           इधर केरल के एक बेटे को को लालबन्दुकधारियों ने मारा था, चूँकि लाल बन्दुक धारियों ने उसे मारा, अत: वो भारत माँ का लाल नहीं रहा. उसका का खून साहेब लोगों को कम लाल लगा क्योंकि मीडिया ने इस मुद्दे को ढंग से नहीं उठाया. या फिर मरने वाला ख़ास जाति या फिर ख़ास मजहब से नहीं था. इस देश में शहादत के लिए भी जाति प्रमाणपत्र चाहिए.
          उधर देश की सबसे पुरानी पार्टी के युवराज लखनउ आ चुके हैं.. विषय है “दलित समुदाय में नेतृत्व” का विकास करना. ये वो लोग हैं, जिन्होंने अपने ऑफिस से एक दलित प्रधान को धक्के मार कर बाहर निकला था. जी मैं सीताराम केसरी की बात कर रहा हूँ. आप भूले नहीं होंगे किस तरह राजमाता के एक इशारे पर कांग्रेस के प्रधान पद से सीताराम केसरी उठा कर बहार कर दिया था. आज किस मुहं से दलित के विकास की बात करते हैं. और पब्लिक है जो भूल जाती है.
          दुसरे ओर आज दो तस्वीरें वायरल रहीं है., एक में कोर्ट में छात्रों को पीटने वकील की, जिसमें वो भाजपा के कई नेताओं के साथ खड़ा दिख रहा है. और दूसरी फोटो श्रीमान केजरीवाल की, जिसमे वे सन चोरासी के दंगों के आरोपी जगदीश टाईटलर के साथ हैं. ध्यान रहे कि दिल्ली में सन चौरासी की फ़ाइल गायब बताई जाती है. उस वकील के लिए हमारे मित्र भाजपा नेताओं को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. पर इतना मुझे यकीन है कि वो वकील जितनी भी फोटू इन भाजपाइयों के साथ खिंचवा ले, आज नहीं तो कल जरूर नपेगा. बाकी रहा टाईटलर ... उसका ये साहेब क्या बिगाड़ेंगे. अपनी अपनी चौरासी है जी, काट रहे हैं.
           पड़ोसी ने नए औजार का अविष्कार किया है और इसमें उसे कामयाबी दिख रही है. याद होगा कुछ समय पहले कांग्रेस के कुछ नेता पाकिस्तान गए थे. और वहीँ से मोदी को गद्दी से उतारने की बात कर रहे थे. काफी जद्दोजहद के बाद इस प्रकार की रूप रेखा तय हुई होगी. अब पडोसी देश को चिंता की कोई बात नहीं है. यहाँ के देशद्रोही हरकत में आ चुके हैं. क्या दिल्ली और क्या कलकत्ता. देश के १०० टुकड़ों की बात शुरू हो चुकी है. बस पैसा यूँ ही इन देश द्रोहियों तक पहुँचता रहे. 


धर्म बेच देंगे !! आत्मा बेच देंगे , 

देश के तथाकथित बुद्धिजीवी गद्दार 
देश बेच देंगे .,,,,,,,,,,,

फिर कहूँगा कि माहौल गर्म है. आप ठन्डे रहिये. कल मिलते हैं , जय राम जी की.