3.5.11

दो गज जमीन भी न मिल सकी कूए यार में

लादेन मर गया......

शायद इसी को कुत्ते की मौत कहते हैं, ठीक ही तो आशु का मेसेज आया था........ ओसामा नामक कुत्ता मारा गया...

पर कई सवाल छोड़ गया..

हिंदू परिपेक्ष्य में ये बात सही सिद्ध हुई की अंतिम वक्त में कंधे भी किस्मत वालों को नसीब होते है ....... बिचारा बहुत बदकिस्मत था..... पर कहीं न कहीं तो किस्मत उसका साथ दे ही गई....... जैसे अंतिम समय में उसके समस्त नातेदार जैसे FBI, ISI वगैरह उसके साथ थे और उसके परिजन भी....
मेरे फरिश्तों ने ही दसकत किये... मेरे मौत के फरमाने पर 
और एक शेर भी ... माफ करना ... "महान" अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ़र का ये शेर भी याद आ गया:
कितना है बद्ननसीब ज़फर दफ्न के लिए, 
दो गज जमीन भी न मिल सकी कूए यार में

बेचारे को दो गज जमीन भी न मिली......

और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ........

हंसी आती है तो रुक रुक कर .... चेहरा ही शर्मशार हुआ जाता है....

बेचारा ओसामा मर गया .... पाकिस्तान पर ऐतबार करके.. उसे याद रखना चाहिए था... जो मुल्क अपने जन्मदाता (भरत) के प्रति वफादार नहीं है ... वो कैसे किसी और प्रति वफ़ा रख सकता है... बेवफा ... मुल्क ... और वहां के बेवफा प्रधानमत्री और वहां की बेवफा सेना और सीआईए.. है न.  

बस ऐसे ही ... क्या करें, गधे और ब्लोग्गर्स में कुछ फर्क तो होता ही है न...... पर एक बात सत्य है.. ... अपनी बिरादरी ही अपनी दुश्मन होती है..... खाप पंचायतें ही बेडा गर्क करती हैं - मात्र अपनों का - दूसरों पर बस थोड़े ही चलता है, अब बिरादरी को क्या कोसना की गधों का माथा जल रहा है... हम तो आपके जज्बे सलाम कह रहे थे.... पर अब पता चला की इंसान और गधों के जज्बे में भी फर्क होता है और हम तो एक ही समझ रहे थे. दिल पर मत ले यार... पता नहीं क्यों ब्लॉग याद आ गया .."लाईट ले यार" पता नहीं किस का ब्लॉग था....  


छोटी पोस्ट है....... जिसे माइक्रो पोस्ट कहा जात है या फिर सोशल साईट की माफिक ट्वीट.. ट्वीट.. ट्वीट..  
जय राम जी की.