15.5.11

सुनो जोगी..




ये गुलमोहर के विशाल दरख्त...

लाल-लाल छितराए हुए... दूर तक

फलक तक फैली शाम की लाली...

और ये अमलतास के

पीले ... पीले खुशी से सरोबार ....

यों दूर से आती रहंट से

पानी गिरने की आवाज़ ..

सुनो जोगी.. सुनो..

फिर मत कहना ..

जिदगी रसहीन है...

और मैं रसिक ...

इस मायावी दुनिया को छोड़ चला...