3.6.11

तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है यार... बाबा राम देव

जिस देश ने देवगौड़ा, आई के गुजराल, नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह जैसे प्रधान मंत्री देखें हो ...... समझ नहीं उनको बाबा रामदेव के प्रधान मंत्री बनाने से क्यों परहेज़ है. तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है यार... 

भगवा कपडे देख कर भड़क क्यों जाते हो... अच्छा भला व्यक्ति भी, बाई चांस संतरी रंग कपडे पहन कर चल पड़े तो तुम्हारी भोवें क्यों तन जाती है हैं.... क्यों मन ही मन सोचते हो की काश मजेंटा रंग १००% होता तो लाल (१००% मजेंटा और १००% पीला मिल कर लाल बनता है प्रिंटिंग उद्योग में) हो जाता - लाल रंग अच्छा लगता है   पर ये तो भगवा है.... अपना घर फूंकने वालों का रंग.. आप तो भूल गए होंगे न सब, क्योंकि भगवा और बाबा को  दोनों को आज मक्कारी और चरित्रहीनता दोनों में बदनाम कर रखा है.

एक राजा तो पड़ोस में अंदर हैं, दुसरे बाहर आज़ाद, अब आज़ाद हैं तो बोलेंगे भी सही, तो सुनो :  बाबा के पीछे आर एस एस है,  .... राजा जी, आपको तो भारत वर्ष में हर घटना के पीछे आर एस एस का हाथ नज़र आता है. और देश में तो यह बात आम हो गई है - हर घटना के पीछे आर एस एस को जिम्मेवार ठहरा दो और अपनी जिम्मेवारी से मुक्ति पाओ, एक चुटकी : बच्चे आजकल पढ़ाई ढंग से नहीं करते.... पता करो, शाखा पर तो नहीं जाने लग गये,   सुनो जी, हमारी पड़ोस में सलमा बेगम ने २ जोड़ी जुड़वाँ बच्चों (४ बच्चों) को जन्म दिया है ..... अच्छा - पता करो - शाखा वाले शर्मा जी का हाथ तो नहीं..... :) हाँ जी, पिछले २-४ वर्षों से देश ऐसा ही कुछ सुन रहा है. 

ऐसा नहीं की और मंत्री नहीं है, हैं भाई : उनकी भी सुनो : कपिल सिब्बल जी कह रहे है : ऐसे मसले एक दिन में हल नहीं होते .............. भाई सालों से तो आप की पार्टी शासन में है - अब आप ही पूछ कर बता दो - कितने वर्षों में हल होंगे - माई बाप  - हम तो हर हाल में राजी हैं. इस सरकार में मंत्री से संतरी तक - सभी परेशान है : किसी ने कोलकत्ता की तो किसी ने मेंगलोर तक की यात्रा स्थगित की है. बाबा को मनाया जा रहा है : धमकाया तो बहुत, दवाइयों में से हड्डियाँ निकली .... कभी लेबर परेशान हो गई - बाबा फेक्टरी में कम पैसे देते हैं, कभी बोला गया की बाबा के पास साइकल के पंचर के पैसे नहीं थी - और अब इतने करोड़ की रकम कहाँ से आ गयी...... पर बाबा अपनी चाल में है - ठेठ हरियाणा की दिहाती चाल ... भाई तो मने रास्ता बता दे  - यार के घर पहुँचने का - और पगड़ी सर पर बाँध - हाथ में लट्ठ   ले चल पड़े तो रस्ते ही पनाह मांगेगे.... जादू है हाँ न ... दूध दही और गेंहू की रोटी....... बाबा तैयार है..

कई लाख किलोमीटर की यात्रा कर चूका है .... देश की नब्ज़ को पकड़ लिया है - और उस दर्द को पहचाना है  ... भूखे पेट को पहचाना है... रासायनिक खादों और इंजेक्शनो द्वारा पेट भरने वाले गरीब के इलाज़ के सस्ते विकल्प हाथ में है.... चाहे काला  धन हो या भरष्टाचार, महंगी रासायनिक खेती के आगे - जैविक खेती की बात हो, महंगे अंग्रेजी दवाओं के आगे  - देसी सस्ती दवाइयां हो..... इस लंगोटधारी  के पास हर मर्ज़ की दवा है... और इसको सिद्ध भी कर रहा है जब १ करोड़ लोगों का विश्वास इस देश में नज़र आ रहा है.  

है कोई ... नेता जो छाती ठोक  कर कह सके ... उपर तीन प्रधानमंत्रियों का नाम लिया है ... उनमे से कोई एक हो... नहीं ... बाबा हैं - भगवा पहन रखा है... वही भगवा ... जो इस पुण्य भूमि को जोड़ने का संकल्प है - त्याग है तपस्या है ....

माफ़ी चाहता हूँ,  श्रीमान प्रधानमंत्री जी, आने वाले कई दिनों में आप सो नहीं पाओगे और मैं आपकी अच्छी नींद और १०% विकासदर के हसीं सपनो के लिए प्राथना भी नहीं कर पायूँगा.... क्योंकि जब से धरती पुत्रों के (किसानो के) हाथों में हल आपको अच्छे नहीं लगने लगे - छीन लिए गए  ... मेरे हाथ भी प्राथना के लिए अब नहीं उठते... क्या करें.. 

राष्ट्र पिता को देखा, बच्चों के चाचा को भी, लोह महिला भी देखी, विनर्म किसान आये, शेरोशायरी करता फ्रेंच दाड़ी वाला भी, कवि चिरकुमार से लेकर कठपुतली अर्थशास्त्री तक ... सभी को तो देखा आपने ... पर कोई बाबा नहीं आया.... आज आया है - ललकार के साथ - हाथ में कमंडल नहीं है - भिक्षाम देहि - ललकार है - क्रांति की ... वन्देमातरम का गान है ...... क्या आनंद मठ की याद ताज़ा नहीं होती ........ - वो दर्द दिल में पनपता ... वन्दे~~~~~~~~~मा~~त~र~म...  ... वन्देमातरम... 

सबसे ऊपर धर्म दंड ... मित्रों ये बाबा गलत नहीं करेगा.... बंद कमरों में चलने दो बैठके... पीने दो बिसलरी पानी की बोतले... पर धरती के नीर पीने वाले, खुले आसमान के नीचे से ललकारने वाले .... माटी के लाल की सुनो  ... अगर सुबह सूर्यनमस्कार किया हो तो धरती माँ के सीने की हलचल सुनी होगी - सुनो --- इस बाबा की सुनो... माँ की पुकार है...


जय राम जी की...