9.10.11

लो भाई अपना रावण फूंको... हम चले - संजय कान्त

हमने इस बार दशहरा नहीं मनाया .....

जी, पिछले कई वर्षों से दशहरा का कार्यकर्म बहुत ही धूमधाम से मनाते आ रहे हैं... लगभग २०-२१ वर्षों से.. उस समय तो कई लड़के बहुत छोटे थे... और कई तो पैदा ही नहीं हुए थे ... खासकर जो शोभायात्रा में राम लक्ष्मण बनते है ... जुड़वाँ भाई, गोली सोनी... जैसा नाम वैसे ही चंचल. एक समय आया कि ये लव कुश बन कर सजे हुए घोड़े की लगाम पकड़ कर चलते थे, फिर वनवासी राम लक्ष्मण, और अब तक राजसी राम लक्ष्मण के स्वरुप में दशहरा की झांकी में अपना योगदान देते थे.

पर सबसे महतवपूर्ण योगदान रहता था संजय भाई का, संजय कान्त. वो 'रावण का काल' की झांकी सजाते थे, जो कि हमारे दशहरे की मुख्य आकर्षण होती थी. आसपास कि कई कालोनियों के दशहरा कमेटियों के प्रतिनिधि उनको अपने यहाँ बुलाते थे और मन माफिक पैसा भी देने को तैयार रहते ... पर तिहाड गाँव का प्रेम संजय को कहीं जाने नहीं देता..

तिहाड़ गाँव के फ्रंटियर भवन में जहाँ, सभी किरदार तैयार होते.... पर संजय अपनी तैयार खुद करता. मेक-अप वगैरह भी... बहुत विभात्सव लगता था... उसके कमर में जंजीरें बंधी रहती... जिसे ६-७ कार्यकर्ता पकडे रहते थे... एक हाथ में मिटटी के तेल की बोतल और दूसरे हाथ में मशाल.... मिटटी के तेल को मुंह में भर कर मशाल पर फुहार सा छोड़ता जिससे कि आग का भयंकर गोला बन जाता था, पब्लिक तित्तर बित्तर हो जाती... पर 'रावण के काल' को न छोडती... उमड़ी रहती ...

कम से कम १२ ढोलों के शोर के बीच संजय का वो अंदाज़ देखते ही बनता था.... आस पास की कोई और शोभा यात्रा तिहाड गाँव की यात्रा के मुकाबले काफी फीकी लगती थी, चाहे उन लोगों ने जितना मर्ज़ी पैसा खर्च किया हो. वो दीवानापन... वो बिंदासपन सिर्फ तिहाड के लड़कों में ही दीखता..

हर साल की भांति संजय इस बार भी सावन में अमरनाथ की यात्रा पर गया था सेवा करने ... पर वहाँ नदी में गिर गया ... जिसे बचाया न जा सका और वो भोले का अनुरागी भोले के धाम में ही फना हो गया..

शाम सात बजे मैं चौक पर बे-मन से आया ... तो रुवांसा चुन्नू मिला.... भरआई आवाज़ में बोला ... भैया अब तक तो जलूस वापिस आ जाता और संजय रेस्ट करने घर चला गया होता, ये बोल कर लो भाई अपना रावण फूंको... हम चले,

मैंने भी यहीं जवाब दिए, हाँ चुन्नू - संजय यही कह कर अपने पक्के घर चला गया, लो भाइयों अपना रावण फूंको... पर मन नहीं माना इस बार.