दुनिया जब दफ्तर जा रही होती है – तो मेरे जैसा आलसी सैर करने निकलता है. उसी झील वाले पार्क में. पिछले सप्ताह में एक लड़की, जो कुत्तों के समूह को कुछ बिस्किट और दूध पिलाने की कोशिश में लगी थी, मैंने सोचा चलो कुत्तों का कुछ अधिक कल्याण हुआ. वैसे भी सुबह कई लोग पार्क में इन आवारा कुत्तों, कवों और कबूतरों को कुछ न कुछ खिलाते हैं.
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| आपसी लड़ाई में जख्मी हुआ - कुत्ता |
घायल कुत्ता ख़ामोशी से बैठा रहा और लड़की एंटी-बाईटिक पाऊडर उसके सर पर लगे घाव पर छिडकती है. फिर वह अपने बैग में से एक साफ प्लास्टिक बाउल निकाल कर उसमे अमूल दूध के पैकट उड़ेल देती है, घायल कुत्ता सटासट दूध पीने लगता है, और बाकि तीन चार कुत्ते चारों तरफ ऐसे बैठे है जैसे मरीज़ का हाल पूछने आये हों, ताज्जुब होता है – उनमे इतनी ‘इंसानियत’ कहाँ से आ गयी कि घायल कुत्ते से छिना झपटी नहीं कर रहे.
लड़की ने अपना नाम ‘चेष्टा’
बताया.
चेष्टा दवाई की दो गोलियां बर्फी में मिला कर लड्डू सा बनाकर उस घायल कुत्ते को खिलने की चेष्टा करती है. बहुत ही न नुकर के बाद कुत्ते ने वो दोनो लड्डू खा ही लिए. लड़की आश्वस्त हो उस बाउल को वहीँ पार्क में धो कर बैग में रख चल देती है.
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| सार-सार को गहि रहे थोथा देय उड़ाय :) दूध तो पी गए महाराज - |
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| बाउल में पनीर डाल कर इन्तेज़ार करती चेष्टा - शायद अब महाराज अब दवाई खा लें. पर नहीं |
चेष्टा किसी एन जी ओ के लिए
काम नहीं करती. कनाट प्लेस में किसी फर्म में सी ऐ है. पर जानवरों के दुःख को नहीं
देख पाती... अत: उनका उपचार करती है. जो ज्यादा गंभीर किस्म से घायल होते हैं
उन्हें वो राजौरी गार्डेन स्थित संजय
गांधी एनिमल केयर सेंटर में ले जाती है.
जब मैं फोटो खींच रहा तो, चेष्टा में मुझे
उसकी फोटो के लिए रोका, पर पता नहीं कैसे वो मोबाइल
कैमरे के जद में आ गयी, और उसकी बिना अनुमति के मैंने फोटो यहाँ चस्पा कर दी है.
इस दुनिया में चेष्टा की तरह बहुत कम लोग है जो चुपचाप अपने काम में लगे है.
.. तुम्हारी चेष्टा को नमन
चेष्टा.
जय रामजी की.


