24.8.12

मुस्कुराइए

मुस्कुराइए कि सरकार मुस्कुरा रही है, क्योंकि 'आपजी', २ जी से बाहर आ गए हैं, बिना किसी नुक्सान के.  मैदाम ने राहत की सांस ले, सरदार जी को भी धीरज बंधाया, जब इतनी ही जीरो वाला 2 जी सरकार की मुस्कान नहीं छीन सका तु ये मुया कोयला क्य छीनेगा : वो भी तब जब मीडिया ने इसे 'कोलगेट' नाम दिया है,

उधर सोशल मीडिया वालों पर निगाहें तो कभी से टेढ़ी थी, अच्छा ही हुआ, 'पडोसी' की हरकतों से कुछ लोगों ने  दंगा फसाद कर दिया और हमेशा की तरह फिर निशाने पर संघ है. अत: संघ परिवार के मुखपत्र के ट्विटर अकाउंट को बंद कर दिया.


गोपाल कांडा को किसी तारा बाबा ने लड़कियों से दूर रहने की सलाह दी थी, कि ये तुझे बर्बाद कर देंगी, पर पैसे, सत्ता का गरूर कहाँ किसी की नेक सलाह पर अमल करने देता है... सो ये मालूम होते हुए भी साहेब बर्बाद हो रहे है... और बर्बाद होते गए. हाय रे इश्क... हाय रे ये लड़कियां...  (मैं कुछ फटटू किस्म का ब्लोग्गर हूँ, अत: इस पंक्ति को वापिस लेता हूँ :) )


एक कैदी को फांसी से पहले आखरी ख्वाइश पूछी जा रही है, और उसका जवाब सुनिए. बढिया लगा ये कार्टून, कहीं मेल से प्राप्त हुआ है. कार्टूनिष्ट का नाम पता नहीं है, सोचा आपसे सांझा कर लूं, ( आपको पता हो तो बता दें,) वैसे भी अब पोस्ट ठेलने के लिए बहाने कम पड़ते जा रहे हैं.


  1. शिवम् मिश्रा : अगर मैं गलत नहीं तो इस कार्टून के कार्टूनिस्ट है श्री सतीश आचार्य जी है