14.7.10

मैं और मेरे पिताजी

  • जब मैं 5 साल का था, इससे पहले की बाते मुझ याद नहीं, तब सोचता था की मेरे पिताजी दुनिया से सबसे ताकतवर इंसान हैं।
  • 10 साल की उम्र में मैंने महसूस किया की मेरे पिताजी हर चीज का ज्ञान रखने वाले और बेहद समझदार भी हैं।
  • जब मैं 15 साल का हुआ तो महसूस करने लगा की मेरे दोस्तों के पापा तो मेरे पिताजी से भी ज्यादा समझदार हैं।
  • 20 साल की उम्र में मेरी यह सोच बनी की मेरे पिताजी किसी और दुनिया के हैं और ने ज़माने के साथ नहीं चल सकते।
  • 25 साल की उम्र में मैंने महसूस किया की अब पिताजी से काम के बारे में सलाह नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि उन्हें हर काम में नुक्स निकालने की आदत सी पड़ गई है।
  • 30 साल की उम्र में मैंने महसूस किया की अब पिताजी को मेरे तरीके से चलने की समझ आ गयी है, इसलिए छोटी-छोटी बातों पर उनसे सलाह ली जा सकती है।
  • जब मैं 35 साल का हुआ तो महसूस क्या की जरूरी मामलों में पिताजी की सलाह लेना बहुत जरूरी है।
  • ४५ साल की उम्र में मुझे लगा की पिताजी की सलाह के बिना कुछ भी नहीं करना चाहिए और १५ साल की उम्र के बाद की मेरी सभी धारणाएं गलत थी।
  • अब तक मेरे बच्चे बड़े हो चुके हैं। परन्तु अफ़सोस, इससे पहले की मैं अपने इस फैसले पर अमल का पता, मेरे पिताजी इस संसार को अलविदा कह गए और मैं उनकी हर सलाह व् तजुर्बे से वंचित रह गया.
बेटा समझता है, बाप बनने के बाद !
बेटी समझती है - माँ बनने के बाद !
बहु समझती है - सास बनने के बाद !

पहले ज़माने में ऐसा नहीं था, हमारे परिवार बहुत बड़े होते थे ... दादा, चाचा, ताऊ, बुआ, चाची, अम्मा- और बच्चे को बचपन में संस्कार मिल जाते थे - मेरे पिताजी दादा से कैसे व्यवहार करते है - माँ अम्मा से और बुआ - माँ से कैसे व्यवहार करती हैं। कहीं बाहर जाकर सिखने की जरूरत नहीं पड़ती थी. बेटा बाप की जी जान से सेवा करता था - क्यों, क्योंकि उसका बेटा भी बड़ा हो रहा है ताकि वो भी बुदापे में मेरी सेवा करे।

आज परिवार टूटे हैं - रिश्ते तार तार हो चुके है. ऐसे में इंसान स्वयं से ही सीख रहा है और ठोकर लगने पर ही संभालता है।

: बाबा :

1 टिप्पणी:

  1. मुझे लगता है यह पोस्ट दीपक बाबा का सही चित्रण करती है ! आप अच्छे दिल के हैं, मेरी शुभकामनायें स्वीकार करें !!

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बक बक को समय देने के लिए आभार.
मार्गदर्शन और उत्साह बनाने के लिए टिप्पणी बॉक्स हाज़िर है.