4.4.12

कुछ तो लिखो मेरे यार.....


कहते हो कि लिखो, कुछ तो लिखो, लो ये कलम और लिख दो दिल के जज्बात, लिखो कि दिल पुकार रहा है, लिखो कि शाम का मौसम खुशनुमा है और तुम नहीं समझ पा रहे हो कि टाइम्स रोमन टाइप लगाया जाए या फिर सेरिफ़... बोल्ड कर के ३६ पॉइंट लगा दिया जाए या फिर नोर्मल ही रुआंसा छोड़ दें, बेदर्द दुनिया से ठुकराए आशिक की तरह.. लिखो इसी को लिखो.
कलम नहीं चल रही, स्याही खत्म है तो क्या... की बोर्ड सामने है, इस मुए कारेल डरा को एफ फॉर दबा कर विराम दो और .... दो पेग लगा कर अपनी मस्ती में फिर से बहो, लिखो ... लिखो कि आशिकों के आंसू खत्म हो गए हैं, लिखो कि दुनिया अब भी बेदर्द है... लिखो कि कैकई कैसे मंथरा की बातों में आ गयी और राम सिंहासन विहीन हो कर बनवासी हुए ... घबरा मत मंथरा अब भी जिन्दा और अपनी जिद्द पर कायम है,...
कुछ तो लिखो मेरे यार.....