6.12.10

मैं ईमानदार प्रधान हूँ, मेरे प्रयत्नों में कोई कमी हो तो बताओ.

जंगल में सभी प्राणियों ने पंचायत की. इस बार प्रधानी में शेर को विजयी न होने दिया जाए..... क्या है कि ताकतवर है, जब चाहे किसी न किसी को तंग करता रहता है, किसी न किसी को उठा कर ले जाता है, अपनी मनमानी करता है. इस बार प्रधानी में किसी और प्राणी को चुना जाए....
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सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ, और बन्दर जी को प्रधानजी के पद पर मनोनीत किया गया. बन्दर जी प्रसन्न हुआ और प्रधानी भाषण पढ़ा गया... बन्दर जी बोले
कानून सभी के लिय बराबर होगा, और पूर्ण स्वतंत्र होकर आपना काम करेगा. हर प्राणी को जीने की पूर्ण आज़ादी होगी
तालियाँ ......
फोटू सेस्सन के बाद सभा विसर्जित हुई.
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कुछ दिन बाद एक बकरी हांफते हाँफते आयी, प्रधानजी प्रधानजी, शेर मेरे बच्चे को उठा कर ले  गया है.....
शेर की इतनी हिम्मत, इस लोकतान्त्रिक जंगल में, जहां हर प्राणी को अपनी आज़ादी से जीना का पूर्ण अधिकार प्राप्त है – वो अपनी मनमानी और गुंडागर्दी नहीं कर सकता, बंदर जी ने जोश में कहा 
प्रधानजी, यहाँ बातें मत कीजिए, जल्दी चलिए...... समय बहुत कम है...
चलो देखते हैं.
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देखा तो शेर एक पेड के नीचे बकरी के बच्चे को दबोच कर सुस्ता रहा था.
बकरी ने इशारा किया...... प्रधानजी उछलकर पेड पर चढ़ गए ......
बकरी चिल्लाई...... देखो, वह मेरे बच्चे की गर्दन पर दांत गडा रहा है
बंदर ने पेड की एक डाल से दूसरी डाल पर उछलना शुरू कर दिया...
बकरी चिल्लाये..... देखो, वह मेरे बच्चे की गर्दन को नोच रहा है
बन्दर ने और जोर से पेड की शाखाओं को हिलाना चालू कर दिया ....
बकरी जोर से चिल्लाती रही...
शेर बच्चे को खाता रहा.....
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बन्दर कभी इस डाल कभी उस डाल..... जा जा कर जोर जोर से पेड की शाखाओं के हिलाता रहा.....
शेर ने बच्चे को पूरा खा लिया.....
बकरी रोने लग गई..... रोड पर स्यापा करने बैठ गई...
बन्दर थक कर पेड से नीचे आया, और बोला..
बकरी ने अर्शुपूर्ण दुखभरे नेत्रों से बन्दर को देखा.....
हांफता हुवा बन्दर सर झुका कर बोला, मैं ईमानदार प्रधान हूँ - पूरी इमानदारी से महनत की, मेरे प्रयत्नों में कोई कमी हो तो बताओ....

जी दोस्तों,
शक्तिहीन की इमानदारी भी किसी काम की नहीं रहती..
शेर बच्चे को खा रहा है.....
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भेडिये और सियार बची हड्डियों को पाने के लिए जंगल पंचायत को ठप्प करके बैठे है...
बकरी विलाप रही है.....
इस लोकतान्त्रिक जंगल में अपने-अपने हिस्से के लिए लड़ाई है, जनता के हिस्से की लड़ाई कौन लड़े. अत: बकरी का विलाप जारी है...

एक प्रधान कह रहा है 
"मेरी इमानदारी में कोई कमी हो तो बताओ.....
अब शेर के मुहं कौन लगे."