9.12.08

चुनाव की बक बक

दोस्तों, पिछले लेख में मैंने राजस्थान की बात की थी, चुनाव का परिणाम आपके सामने है - वही हुआ - जाटों ने महारानी को सत्ता से बहार कर कांग्रेस के सर पर काँटों का ताज रख दिया । और सामने खड़ा कर दिया शीशराम जी ओला को - लो इनको मुख्यमंत्री बनायो। इस प्दद के दूसरीऐ दुसरे दावेदार है पोर्र्वा मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी - उम्दा प्रशाशक - पर इन्होने अपने पिछले कार्यकाल मेंन सरकारी कर्मचारी और इसी बिरादरी को रुष्ट किया था। एक और शक्श है - श्री सी पी जोशी जी - जो मात्र एक वोट से हार कर दोड़ से बाहर हो गए हैं। एक बात और जो सामने आई की कम्युन्ष्टों ने इस राज्य में ३ सीटें लेकर आपना खता खोले दिया वहीं दूसरी और उत्तर प्रदेश की मलाई खाकर मस्त होकर हाथी भी राजस्थान में गुस गया और कांग्रेस की खड़ी फसल बर्बाद कर दी। pehle भाजपा की - भाजपा ने यहाँ पर निवारात्मान मुख्यमंत्री वसुंधरा को पूर्ण अधिकार दे दिए - उन्होंने टिकटों का बंटवारा अपने हिसाब से कर दिया - और कईयों को बागी कर दिया। १ - २ मंत्री भी बागी हो गए। गुज़र समाज तो पहले ही एकतरफा लडाई के मूड में था - सो भरतपुर - करोली आदि स्थानों पर इन्होने एकतरफा ९० प्रतिशत तक मतदान किया । पुलिस की गोलाबारी से ९० किसान मर गए थे वहां पर कमुनिस्तों ने अपनी जमीन पा कर ३ सीटें हथिया ली। बगिओं ने भाजपा को कम से कम 20 - 25 सीटों पर चोट पहुंचाई । इस राज्य में कांग्रेस भी कोई अच्छी पोसिशन में नहीं थी। न कोई नेता - न कोई नारा । हालाँकि हाई कमान ने शीशराम ओला kओ अधिकार दे कर आगे कर दिया था। गहलोत की अपनी पृष्ठभूमि थी । एक - बात अहम् है इस चुनाव में लोगों ने बहुत सकीर्ण नजरिया अपनाया । न तो पार्टी देखि गई न घोषणा पात्र देखा गया - बहुत ही सकीर्ण नज़रिए से - उमीदवारों को वोट दिए गए।
दूसरी स्टेट थी दिल्ली - यहाँ तो करिश्मा हो गया - ओवर ब्रिज - मेट्रो के नाम पर शीला मैया तिबारा जीत गई - विजय जी विजय श्री से दूर हो गए । यहाँ कोंग्रेस नहीं जीती - न ही भाजपा हरी है। पिछले 1५ सालों में दिल्ली में एक नया वर्ग उभरा है - जिसकी जुबान हिन्दी - एंगलइश - पञ्जाबी है - बेशक ये लोग पहाडी - बिहारी - पूर्विये हैं लेकिन इनकी दोसरी पीडी दिल्ली में जगह बना चुकी है - और यह yuwa पीडी अपने को शुद्ध दिल्ली वाले मानती है - शीला मैया इनकी नेता । इनको नहीं मालूम विजय जी ने कितने पापड़ बेले उन्होंने दिली के लिए क्या क्या किया । इन्होने कभी विजय जी का फोटो अख़बार में किसी अस्पताल का उद्घाटन करते नहीं देखा - कभी विजय जी का दिल्ली के विषय में कोई स्टेटमेंट नहीं पड़ी ।


भाजपा आज के युग में १९६७ का टेंक उठा लाये। विजय जी का जमाना जा चुका है । आज जमाना है - नये वर्ग का - जो सुबह १ घंटे सलून जा कर टीवी पर आए और खबरिया टीवी के एंकर की तरह जल्दी जल्दी हिन्दी और अंग्रेजी में बात करे । नए ज़माने की बात करे। जगदीश मुखी या विजय गोएल या अरुण पुरी जैसे बन्दों की जरूरत थी । जो भी हो - भाजपा के कार्यकर्ताओं ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी - भीतर घाट किया है - वोही सब जो २००३ के चुनाव में खुराना जी के साथ किया था। मुख्यमंत्री का उमीदवार उपर से थोपा गया - और छोटे नेता क्या जिन्दगी भर के लिए छोटे ही रहेंगे - उन्होंने जमीन मुंह चुराया । और ४ सीटें तो थाली में परोस कर कांग्रेस को दे दी गए - अकाली कोटे में ।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में - जो भी हुवा अच्छा हुवा - और येही होना था। बेदाग छवि - दमदार नेतित्वा - फिर सामने चाहे - योगी आए या नाथ । पिछले पाँच वर्षों में मध्यप्रदेश ने ३ मुख्यमंत्री देखे भाजपा के बनाये हुवे - तीसरे आए शिवराज चोहान - जनता को ईश्वर मान ख़ुद को किसान का बेटा मान कर मिदान में उतेरे और जनता ने आशीर्वाद दे दिया । कितना भय था उमा का - बागियों का - पर चोहान की झोली जनता नें वोटों से भर दी।

छत्तीसगढ़ में रमन बाबा के काम सर चद्द कर बोले ... चावल वाले बाबा .... सलवा जूदम .... नक्सलियों से loha ... और एक निश्छल वक्तिवा । जी हाँ रमन सिंह के पक्ष में ये बात जाती है .... आदिवासियों को १ रूपी किलो चावल देकर रमन सिंह चावल वाले बाबा बन गए । नक्सलवाद से सकती से निपटा गया । रही बात कोंग्रेस की तो उसने यहाँ पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजित जोगी को कप्तान सोंप राखी थी । वाही अजित जोगी ..... जिनका बेटा एक मर्डर केस में शामिल था ... व्ही अजित जोगी जिन्होंने पिछले चुनावों के बाद देश के सामेने विधयाकों की खरीद फरोक्त की थी । ऐएसे विषम चरित्र को पर पाना कठिन था ... पर रमन सिंह ने sएहार्द्यता से इनको किनारे किया।

दोस्तों , पोस्टिंग में जाकर लिखने में काफी दिक्कत आती है । अरमान मन में रह जाते हैं । कृपया टाइपिंग का कोई सॉफ्टवेर बताये जहाँ इनस्क्रिप्ट में टाइप किया जा सके ..... बहरहाल जय राम जी .....