5.11.11

बकरे की माँ ... कब तक खैर मनाएगी..

तिहाड गाँव के पार्क में घास खा गिनती के दिन गुजारता
१०,५०० रुपये का बकरा..... इसकी कुर्बानी के लिए
जो शक्श्स आएगा वो ५०० रुपे मेहनताना लेगा..
इसका मांस मित्रों और रिश्तेदारों में बांटा जाएगा..
इसका चमड़ा दान दिया जाएगा... मदरसों को
'गरीब' विद्यार्थियों के लिए...

बकरे की माँ ... कब तक खैर मनाएगी..

जी कल रविवार तक और... बस
उसके बाद
उसके बाद कुर्बानी है...


पर हमारे यहाँ तो बकरे की माँ कई सालों तक खैर मनाती है...
जी तुम्हारे यहाँ के बकरे अल्पसंख्यक होंगे न...
अल्लाह उनकी सुनता है... 

अफज़ल गुरु 
अजमल आमिर कसाब 











इन सुसरों का तो कुछ भी काम नहीं आएगा.

तुम देते तो झटका हो पर फ़ाइल पेंडिंग करते हो
हम हलाली पर विश्वास तुरंत फुरंत झटका देते हैं