30.9.10

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।



भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। 
लोचन अभिरामा तनु घनश्याम निज आयुध भुज चारी। 
भूषन बनमाला नयम बिसाला सोभासिंधु खरारी।। 

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता। 
माया गुन गयानतीत अमाना बेद पुरान भनंता।। 
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। 
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।। 

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रों प्रति बेद कहै। 
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै।। 
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै। 
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।। 

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा। 
कीजै सिसुलीला अति प्रियशीला यह सुख परम अनूपा।। 
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावहिं हरि पद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।


हृदय में सुंदर भाव भरकर मानव कल्याण की विशुद्ध हिंदू कामना लेकर
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को सर माथे रख कर बोलिए
श्री रामचंद्र महराज की जय.
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जब कोर्ट का फैसला आया तो मन हर्षो-उल्लास से भर गया और मन हुवे श्रीरामजन्म वाली चोपाई लिखी जाए.
बाकि दिन में २ बजे ये पोस्ट लिखी थी अजोध्या का फैसला - जय हो टर्कोलाजी