13.11.10

श्री श्री १००८ श्री समीरानंद जी महाराज - दिल्ली में ब्लॉग पूजा

लिखो भाई, कुछ तो लिखो........
इत्ती भी का जल्दी है..... काहे लिखो लिखो लगा रखी है....
अरे बड़े बाबा आये थे ... बिदेश से.... कह रहे थे कुछ न कुछ जरूर लिखो और का कहते है सकारात्मक, स्रुजान्तामक और भी पता नहीं कैसे कैसे शब्द बोल रहे थे ...... उ वाला लिखो......
बड़े बाबा कौन भाई.......
अरे ‘उड़नतस्तरी’ में विदेश से चल कर अपने देश पहुंचे श्री श्री १००८ श्री समीरानंद जी महाराज के प्रवचन थे........
अच्छा, लगता है ....... तुमहो भी आज दिल्ली दीवान गए थे........
हाँ बाबा...
अरे अस्त्र सशत्र भी ले गए थे का....... बोला गया था...
अरे बाबा..... उधारे कैमरा मांगे थे ‘पूर्विया’ से, फोटो तो खींची ...... पर उ कैमरा तो पूर्विया जी ले गए.......
और कोनों भाषण – वाषण भी टेप किये हो..... मोबाइल में
अरे बाबा, आप भी छट पूजा की तरह आधे घुटने पानी में खड़े होकर हमका ज़लील कर रहे हो....... अगर इत्ते पैसे होते की सभी अस्त्र शास्त्र अपने पास रखते तो फिर कोनों बड़ी पत्रिका में संपादक होते ........ इहाँ निठ्ठले बैठ कर ब्लॉग पूजा जरूरी करनी थी......
चलो छोडो, हमका धृष्टराष्ट माना और संजय की तरह कमेंट्री करा .....
हाँ बाबा... इ बात .... बस इ हमरे बस की है......
हम लेट पहुंचे प्रोग्राम में ... प्रोग्राम चालू अहे .... सबु ब्लोगर भाई ... अपना अपना नाम और ब्लॉग नाम वगैरा बताए रहे........
कोनों ‘अविनाश’ जी बताए रही .... जो उ प्रोग्राम को सेट किये ..
और ब्लोगर लोग भी तो आये होंगे......
अरे बाबा.... आप तो सर्वग्यानी है... समझ ही रहे होंगे.... हम ठहरे मूढ़ मति ... कुछ समझ नहीं आया ... क्वोनो आये और क्वोनो नहीं ...
यानी ....... नाम भी नहीं मालूम..
हाँ, बाबा उ घुम्मकड छोरा रहा न........ का नाम है ‘नीरज जाट’ उ आया था परमानेंट बैग लटकाकर, उ क्वोनो नारीवादी ब्लोगर थी रचना दीदी  आई थी .......... उ बहुते पचड पचड बोले रही........ बोले की सभी ब्लोगर अपने अपने घर में एको ब्लॉग और चलो करवाइए ... हमहू बोले........ हमरी सरिमती जी अगर ब्लॉग लिखेंगी तो चूल्हा चोव्का कोण करेगा..... पता चले की जो कमा रहे उका खाना बाहर होटल से आ रहा.........
 चुटकले वाले राजिव तनेजा आये रहे....... उ अपनी तनेजी के साथे थे......  और हाँ एको बात बताना भूल गए...
का भाई
बाबा, उ सतीश सक्सेना भी आये थे..... इन्हा जवानी में नज़र आते हैं... उन्हा हम नहीं पहचाने.... बाद में पता चला इ हरे शर्ट वाले सक्सेना जी है...... अब लगता है बुडिया गए है..... पर फोटू में जवानी वाले लगाए रखे है.....
नहीं बाबा, पर इ बोल दिया की भाई फोटू तो कम से कम अभी का लगाओ....... कहीं मिल जाए तो रामा-शामा तो हो जाए..
ठीक भाई. सही कहा.....
और क्वोनो अच्छी बाते बोले......
बाबा उ प्रभा साक्षी के संपादक थे ............ उ का नाम भी ध्याने नहीं आ रहा ..... बहुते प्यार से समझाया ...  और कविता भी पढ़ कर सुनाई ..... और हाँ रतन सिंह शेखावत जी आये थे..... बिना पगड़ी के .... उ भी पहचान में नहीं आये....
और
और वर्मा जी थे, पुरविया से लगे रहे बतियाने....... एको एरिया से थे ना......
और बताओ
और हाँ, अजय झा आये थे........ तुरंत फुरंत फोटू खीचे रहेई ... और पोस्ट भी कर दिया...
पर तुमहो बुरबक फोटू काहे नहीं लगाया.....
अरे बाबा, उ पुरविया जी तुम जानत रहे.... बोले सरकारी दफ्तर बंद हो गया छो: बज़ गए...... अब सोमवार को बात करना......
और कोई नाश्ता वगैरा था.........
हाँ बाबा, चाय और समोसा के साथ मिठाई रही, हमहू जल्दी में रहे ....... प्रेस में काम था........ चाय पि कर निकल पड़े..... पर एक बात..... उ रजिस्टर भेजा गया था....... इंट्री के लिए...... उ में सुझाव का कालूम भी था...... हमने लिखा था ... सुझाव : चाय गर्म होनी चाहिए...... पर ठंढा था......
अरे बुरबक ..... एक तो मुफ्त की चाय पीवो और गर्म की बात भी करा......