23.8.10

हम तो झंडू बाम हुए ... बाबू साहिब तेरे चक्कर में

इस मायावी दुनिया में सभी लोगों की नहीं चलती बाबू साहिब – अब पता चल गया. हमरे बापू खूब समझाते थे... बेटा ई दुनिया में पैसे और रसूख वाला आदमी ही इज्ज़त से जी सकता है – जरा संभल कर चलना।

महंगाई डाइन के चक्कर में हमऊ नें भी फैक्ट्री मालिक में हल्ला बोल दिया. मालिक से कह दिया ... पगार बढाइये. पूरी दुनिया में सबसे गरीब सांसदों की तनख्वाह बढ़ गई है तो हमुकी भी बडनी चाहिए. मालिक नें इनकार कर दई... अपने रोना रोने बैठ गई... फैक्ट्री में काम नहीं है... किराया बहुत है.. कम्पीटीशन का ज़माना है ... मशीन पुरानी है.... प्रोड़कशान निकल नहीं पाती... .................. बस का बताई हमर दिल भी बैठ गया. पर का करी.... पगार न बडवाते तो ऊ ससुर लाल झंडे वाले कामरेड दिमाग झनझना देत रहे. ..........

हमका कछू समझ न आई.......... या तो उ कामरेड लोग का सुनी .... या दिल का सुनी... या फिर मालिक साहिब का दुखडा देखि. चाय का दूकान पर अखबार में बाबु साहिब, आपके बारे में खबर पढ़ ई ..

“वेतन में पांच गुना तक बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध कर रहे विपक्षी सांसदों ने संसद स्थगित होने के बाद समानांतर सरकार बना डाली। लालू यादव को प्रधानमंत्री चुना गया और मुलायम सिंह यादव को गृहमंत्री बनाया गया। इतना ही नहीं भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे को लोकसभा अध्यक्ष बना दिया गया। ‘

बस फिर का था.... हमूऊ जोश में आ गए....... तुरत फुरंत फैक्ट्री गए ....... और मालिक साहिब की कुर्सी पर धसिया कर बैठ गए............... और मालिक का चश्मा लगा कर खुद को फैक्ट्री का मालिक घोषित कर दिया. ................ ई रामदीन इहाँ आवा..... ए किश्न्वा..... औ अनिलवा... तुम भी. सबो लोग अपना अपना कापी लेइय आवा.... आज के मालिक हम.... सभो का पगार बड़ा दिया जावेगा. ................. खूब मजा आवा.... मन ही मन शुक्र किया आपका .... आपहो की आइडिया चल गया .............. हमारे मन में खूब आया की आप प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो हमू भी फैक्ट्री के मालिक काहे नहीं बन सकते सरकार.

पर उ फैक्ट्री में एक तो ........ चम्च्वा रही मालिक का ........... तुरंत – फुरंत मालिक के फोन हुई गवा............... और मालिक आ धमके फैक्ट्री में .... हमका उठा कर गेट से बहार फेंकवा दिया गया. हम अपनी जिंदगी पर रो रहे है ............... जब हमे गेट से बहार फेक्वा दिया गया तो आपको क्यों नहीं संसद से बहार निकाला गया .... ई तो लोकशाही है बाबू.... कानून सबके लिए बराबर है....... महात्मा गाँधी दिला गए हैं आज़ादी ... पर आपकी पगार १०,००० रुपे बड गयी और हम बेरोजगार हो गए.............. काश अपने बापू की बात मानी होती। दुनिया को देख भाल कर चले होते।

बाबू साहिब .............. रेडियो पर गाना बज रही है .... मुन्नी बरबाद हुई – राजा तेरे लिया ......... और हमरा दिल खूब रो रहा है ............. क्योंकि हम तो झंडू बाम हुए बाबू तेरे चक्कर में।