26.8.10

गृहमंत्री जी एक लाइन खींच रहे है .. भगवा आंतकवाद की.

पान की पीक खिडकी से थूकते हुवे माट्साब ने ब्लैक बोर्ड पर चाक से एक लाइन खींची ... और छात्रों से बोले की, बच्चो अब इस लाइन तो बिना काटे छोटा कर के दिखाओ. एक ग्रामीण सरकारी स्कूल में जहाँ सीमेंट के चद्दर की छतें दोपहर में तप रही थी... दरअसल ये १९८३ का वाक्या है।

छात्रों को कुछ समझ नहीं आया.. आज माट्साब क्या पदाने के मूड में है. पर माट्साब आज कक्षा ८ के विद्यार्थी को जीवन के गुर सिखने के मूड में थे. अंग्रेजों के ज़माने के माट्साब थे.. दीन दुनिया देख रखी थी..... पता था ... कल जीवन में मेरे छात्र कहाँ मार खायेंगे. क्यों न आज ही इनका जीवन दर्शन स्पष्ट कर दिया जाए.... आगे पता नहीं कितने बच्चे स्कूल जाना छोड़ देंगे.

बच्चों में प्रशन वाचक कातर नज़रों से माट्साब की तरफ देखा..... माट्साब होंठ बंदकर के मंद मंद मुस्कुराए ... दुबारा पीक खिडकी से फैंकते हुवे बोलना चालू किया...........
“इस लाइन के निचे मैं बड़ी लाइन खीच देता हूँ..... ये .. ये लो.... देखो मैंने उपर वाली लाइन के नीचे एक बड़ी लाइन खींच दी.......... अब उपर वाली लाइन छोटी हो गई न. मैंने उपर वाली लाइन को न तो काटा न डस्टर के मिटाया फिर भी वो नीचे वाली लाइन की अपेक्षा छोटी हो गई.”

........ दिमाग की मेमोरी इस कम्पुटर की मेमोरी से भी बहुत बड़ी है ........... पता नहीं कितनी जी बी की होती ... कोई अंदाजा नहीं.. आज सुबह से फिर दिमाग में वही माट्साब घूम रहे थे... वही लाइन वाली थेओरी............. बिलकुल हमारी राजनीति पर सटीक बैठती है.

............ एक लाइन सरदार बल्लभभाई पटेल थे... व्यवस्था ने उनको छोटा दिखने के लाइन कश्मीर का मुद्दा अपने हाथ में लिया और एक लंबी लाइन खींच दी. आज तक वो मुद्दा हाथ में पत्थर लिए खड़ा है. अब एक नए लाइन खींचने की तयारी है... स्वत्तता.

....... एक लाइन पंजाब में अकालियों की थी- व्यवस्था नें ठीक उसके नीचे भिंडरवाला की बड़ी लाइन खींच दी .. अकाली लाइन छोटी हो जाये. इसका हश्र सभी जानते ही हैं...

......... एक लाइन महाराष्ट्र में बाल ठाकरे थे. उनके नीचे एक लंबी लाइन खींच दी – राज ठाकरे की. चलो बाल ठाकरे तो छोटे हुवे. बाल ठाकरे को निपट नहीं पाए ... अब राज ठाकरे को निपटो. (सोचा ये था – दोनों लड़ मरेंगे.)

......... झारखण्ड में एक छोटी लाइन थी – भाजपा की... सभी नें मिल कर एक बड़ी लाइन खींच दी मधु कोड़ा के नाम की. जो खुद ही व्यवस्था बन कर पूरा राज्य ही लील कर गया.

........ भुखमरी की एक लाइन खींची हुई थी.. गरीबी रेखा के रूप में .... अब उनके खेत, जंगल लेकर एक और बड़ी लाइन खींच दी गयी. अब तक रोटी को रोते थे. अब जंगल जमीन को रो। रोटी तो नहीं मांगोगे – गोदामों में गेंहू सड़े तो सड़े.

.......... एक लाइन खींची थी – लालचोक कश्मीर से – लालगढ़ – पश्चिम बंगाल तक आंतकवाद की --- अब व्यवस्था के प्रतीक गृहमंत्री जी एक लाइन खींच रहे है .. भगवा आंतकवाद की.


दिल की आवाज.............
यानि की ये स्वंतंत्र भारत की मिसाल है की जो समस्या हल न हो तो एक और बड़ी समस्या पैदा कर दो... कम से कम लोग पुरानी समस्या तो भूल जायेंगे। एक दो व्यक्तियों की बगावत को ये माननिये भगवा आंतकवाद की परिभाषा दे रहे हैं।

6 टिप्‍पणियां:

  1. aaj ke rajneetigya netaon ko chhodkar sabko aatankvadi ghoshit karden yah din bhi bhavishya main jal aayega,

    "Desh Ke Sabse Bade Atankvadi-BhagvaDhari Nahi
    Khadi_dhari Hain"

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  2. हमारे राजनेता गिरगिट की तरह रंग बदलारे रहते है,

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  3. सबसे बड़ी रेखा है पब्लिक,बशर्ते वह स्वयं अपनी अहमियत समझ ले।

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  4. aur chodi chanta he jo kuchh nai kah paati he chunaaw ka sidhe bahishkaar karen aise neta chunte hi kyu hen .............

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  5. WAAH SAHAB DIL JEET LIYA AAPNEY TO BAHUT HI ACHHA LEKHH... HUM TO CHITAMBARAM KO THAPPAD MARNE KI SOCH RAHEY THEY AAPNEY TO UNKE MUH PAR HI THOOK DALA...

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बक बक को समय देने के लिए आभार.
मार्गदर्शन और उत्साह बनाने के लिए टिप्पणी बॉक्स हाज़िर है.