5.8.11

रे चाची कहाँ भाग गयी तु

चाची राम राम......... रे चाची कहाँ भाग गयी तु........ देखो सारे बच्चे बिलख रहे हैं...

अरे, मेरे कौन से बच्चे हैं, मात्र दो ही तो हैं, और उनको मालूम है मैं कहाँ हूँ.

 चाची, 
तेरे  दो बच्चे तो याद रहे, पर बाकी भूल गए, उ अम्मा भी तो एके पार्टी बना गयी थी, उक के सबे मेम्बर भी आपके बच्चे सम्मान हैं... .. और उ पूरा गाँव ही आपके लिए हवन यज्ञ कर रहे हैं, उ का आपके बच्चे नहीं............

रे भोले राम, तू चालीसा पार कर गया पर रहा भोले का भोले, 

का चाची, का बात कर दी, हमू और भोलू राम...

और क्या,

अब हमरी सास कौनो पार्टी शार्टी बनवा जरूर गए थे, पर हमरा एको काम रहा, उ पर शासन करना, - त्याग तपस्या का पाठ पढ़ाना, बस...... और उ पार्टी जबे अपनी ओकात में आवे तो पुरे गाँव में शासन  करना..... बस. 


चाची, तेरा गाँव अलग, तेरी जात अलग, हमरा चाचा बिआह लाया और हमने मान लिया तू चाची है....... मा सरीखी..... अब चाचा रहे नहीं और तू कैसी बात करे है.... चाची कुत्ता भी घर में १० साल पालो तो पहचान जाता है - किस पर भौंकना है और किस पर नहीं..... तू तो इंसान है ...

भोले राम......... औकात देख कर बात कर, तेरी इंतनी हिम्मत.........

पैर पकड़ता हूँ चाची.......

चल माफ़ किया..... पर आईंदा से ध्यान रहे, मेरी गोरी चमड़ी है और तेरी काली..... बस...... सदियों से काली चमड़ी बस पिसती ही रही है ..... गोरी चमड़ी से..... अपनी औकात मत भूल, तेरे चाचा की गौरी चमड़ी थी......... 

कैसे थी, और क्यों थी ये तू जान....... मेरे से फालतू बात मत कर.

ठीक है चाची........ पर गाँव में इ तो बता दे ....... गाँव छोड़ कर क्यों भागी.........

बेटा, हर बात बताने की नहीं होती, औरत जात हूँ, कई लेडिस प्रोब्लम हो जाती है ........ उका बताया नहीं जाता..... 

चाची, उ सरदार को तो बताये जाती, जो तू पंचायत में बिठा दी....

बेटा उ सरदार की सरदारी अपने हाथ है, लगे हाथ इम्तिहान हो जाएगा, या तो सरदारी छोड़ देगा या फिर वैसे ही बने रहेगा...... अपना कुछ नहीं है....

पर उ सब गाँव के भांड.......

रे उनका चिल्लाने देव, चिल्ला चिल्ला कर जब गल्ला बैठ जाब तो खुदे शांत हो जाए....

और उ जो कुछ दिलजले भाट जो दिन भर तो काम कर रोजी रोटी कम, शाम गाँव आकर बैठ गए उ विश्व व्यापी 
बूढ़े बरगद, के निचे और रात भर जाग जाग गाँव में आल्ह गाते रहे है - गाँव वालों को भड़काते रहे........ उका का किया जाए.........

उका का करना है....... गला फाड़ फाड़ खुदे थक कर बैठ जाएंगे.......... उका ज्यादा ध्यान देने की क्वोनो जरूरत नहीं - समझे...

और मुनीम जी भी ......... पंचायत में पूरा लेखा जोखा ले कर आ गये ........ और पूछे लगे हिसाब किताब..... 

अरे उमे का है, क्वोनो 'बच्चा' आगे कर दी और बोले सब हिसाब - किताब में घोटाले इ बालक ने किये है..... 

वाह चाची वाह...... मान गए, माने अपना किल्ला गडा रहे भाड़ में जाए गांव पूरा.....