31.8.11

जनता बेचारी नग्न है...


पूजा का दिया..
मंदिर की घंटी..
धूप कपूर और बाती 
प्रसाद, खीर और पूरी
पता नहीं कितना कुछ..
वाह
प्रभु आप तो  मग्न है..

जनता बेचारी नग्न है...