16.8.11

क्रांति का समय है......... युवा वर्ग साथ है.

और कुछ हो या न हो – पर भारत देश में लोगो में लोकतान्त्रिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बहुत है........ बहुत ज्यादा. अपने घर में पानी न आये – लाइट २ दिन से नहीं आ रही .... रोड खुदी पड़ी है... कोई प्रोब. नहीं – एडजस्ट हो जाता है...

पर जहां बात लोकतंत्र की आती है तो – पब्लिक उमड़ पड़ती है जैसे बोतल से बीयर को गिलास में डालते ही झाग उभर आती है . ............... नहीं सहेगा हिन्दुस्तान. भावुकता हमारे समाज में कूट कूट कर भरी है.
सुबह सुबह आनंद का फोन : बाबा, अन्ना को गिरफ्तार कर लिया है ... चलो वहीँ चलते हैं.... बेचारा बुडा परेशान होगा.
७३ न. रूट की डी टी सी  की बस....... भादों की झड़ी और दिल्ली का जाम. २० मिनट में चले १ किलोमीटर – और मुझे जाना है ६ किलोमटर ..... कुछ न कुछ होना चाहिए... मसाला चाहिए – टाइम पास करने को. सामने की सीट पर बैठे युवा बार बार फोन पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है
‘भैया मैं आ रहा हूँ सिविल लाइन ..... इन्तेज़ार करना. जींस और ट-शर्ट में. और  हाँ हाथ में सफ़ेद कुरता.
अन्ना के समर्थन में जा रहे हो.. हाँ,
कुर्ती वहीं पहनोगे ..हाँ,
टी-शर्ट में ठीक नहीं...और कुरता यहाँ ठीक नहीं मैंने सोचा.
रामदेव के आन्दोलन में गए थे ? - हाँ, जब लाठी चारज हुआ तो मैं वहीँ था......
अच्छा .अन्ना पर लाठी क्यों नहीं चलती.
नहीं, अन्ना पर नहीं, रामदेव बहुत फालतू बोलता था, सन्यासी को वाचाल नहीं होना चाहिए.
इसलिए पिटवा दिया.. :) या कांग्रेस भगवा पर ऐसे टूटती है जैसे लाल कपडे को देख कर सांड बिदक जाता है.
नहीं, अन्ना बहुत सोम्य है.. और पूरा देश उनके साथ है.
नहीं ऐसा कुछ नहीं, अन्ना कांग्रेस के एजेंट हैं..... हाथों की कठपुतली है...... वैसे भी राजमाता को कठपुतली नाचने का बहुत शौंक है.... अन्ना को भी युज किया जा रहा है तभी .........
आगे से एक और प्रबुद्ध महाशय आ पहुंचे और लगभग चिलाते हुए बोले ...
क्यों भ्रम पैदा कर रहे हो पब्लिक में...... अन्ना के साथ युवा वर्ग है – अब क्रांति होगी...
युवा को समय कहाँ मिलेगा....पूरा देश है साथ – खासकर यूथ है अन्ना के साथ. और तुम यहाँ बैठ कर ऐसे भी कन्फुज कर रहे हो... बेकार की बातें है सब.
आप की तारीफ..ठहरो ...ये फोटू देखो..... अन्ना के साथ जो है – वो मेरा बेटा है...... और मुझे खुशी है.हाँ, क्रांति कर रहे हैं.
ललित ककरोला से आ रहा है – अन्ना से समर्थन में और दूसरे साहेब प्रेम हैं जो सुभाष नगर में रहते हैं.
जो भी हो, मामला सामने है.... राजनीति पार्टियां भी साथ आ रही है ..... टीम अन्ना अंदर है – स्वामी अग्निवेश बाहर ...... वो बाहर क्यों है .. पता नहीं – शायद बातचीत के लिए.
अन्ना – ये आमजन है – जो धंधा छोड़ कर तेरे साथ चल पड़े है ....... बेचारे हर जगह पिटे हैं.... कईयों के साथ चले – पर इनके साथ कोई नहीं चलता...
लोकपाल बिल आएगा...... या नहीं ...
इमानदारी से राज्य चलेगा ... या नहीं...
पर चिंता मत करना – ये पब्लिक भूल जायेगी... अन्ना के लिए कभी कुछ कीमती समय निकला था. युवा फिर व्यस्त हो जायेगे....
आज परेशान है .... कल फिर इन्ही से साथ - कोंग्रेस का हाथ होगा. शुक्र है ...... पब्लिक है – भूल ज़ाती है....   अगर ना भूलती तो – तो भारत देश के पागलखाने कम पड़ जाते.

जय राम जी की.