12.10.10

दो पैग - शांति और प्रभु दर्शन .

शान्ति का दान दीजिए.........
कृपया शांत रहिये........
जैसे शब्द कई जगह लिखे होते हैं..... कई बार सोचते थे की शांत ही तो हैं.
पर ८-१० घंटे घर में बिलकुल एकांत में बैठने पर ये बात समझ आ जाती है. मोबाइल को स्विच ऑफ कर दीजिए...... लैंड लाइन फोन उठा कर रख दीजिए........... सौगंध खाइए .......  की किसी भी स्क्रीन के सामने नहीं बैठेंगे.  खुद चाय भी मत बनाइये.......... किताबों को भी शेल्फ में रखी रहने दो..
शांति........
अनंत शान्ति.............
सुई भी नहीं गिर रही..........
शमशान के पीछे की शांति से भी ज्यादा खतरनाक........ ज्यादा विभात्सव........ आजमाइए.
    खुद को आप कितना भी दार्शनिक समझें – पर ८-१० घंटे दिमाग कि दही करने को बहुत हैं. नहीं रह सकते. हम लोगों की जीवनचर्या........ बिलकुल बदल गयी है. सारा दिन कितने लोगों से घिरे रहते है. कई बार लगता है – नहीं एकांत चाहिए......... पर आज एकांत को हजम नहीं कर पा रहे.



दिन के अंत में २ पैग अंदर जाते ही शांति – भक्ति में तब्दील हो जाती है. परमात्मा साक्षात् उपस्थित हो जाते हैं.
हरे कृष्ण हरे कृष्ण - कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम - राम राम हरे हरे
सूफी नृत्य....... तेज
और तेज
नहीं
नहीं


इस्कोन वाले गंजो जैसा नृत्य..........
तेज
और तेज
हरे कृष्ण हरे कृष्ण - कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम - राम राम हरे हरे

आध-पौन घंटे – नहीं शायद एक घंटे............
हरे कृष्ण हरे कृष्ण - कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम - राम राम हरे हरे

निढाल हो कर – फिर वही शान्ति.........................
निश्छल ........
शांत........
वो तख़्त ही तो साक्षी है..............

दिवार पर लगे चित्र से डैडी देख रहे हैं.......................
कुपुत्र की हरकतों को...
शान्ति.....
और
आंसुओं की वो अविरल धारा.......
पता नहीं कब तक...........
कब तक.........
वही आंसू


फोटो  mumbaimoments.com से साभार .