24.10.10

कुछ विसंगतियों भरी बात

आईये, कुछ विसंगतियों भरी बात करें.
हमारे देश में जो प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण छात्र होते हैं – बहु-मुखी व्यक्तित्व के धनी... कहीं तकनिकी, इंजीनियरिंग अथवा डाक्टरी विद्या में परांगत होकर – ऐसा ही व्यवसाय चुनते है और इनमे से भी कई महापुरुष ब्लोग्गर बनकर हिंदी और समाज सेवा का वर्त धारण करते हुवे खाली समय इन्ही सब (चिरकुट???) कार्यों में जीवन खपा देते हैं.
द्वितीय श्रेणी वाले कम नहीं रहते ....  MBA  करके प्रशासनिक कार्यों में दक्षता हासिल कर उपरोक्त प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण के छात्र को संचालित करते हैं. जीवन क्षेत्र में यही द्वितीय श्रेणी वाले ही मौज करते नज़र आते हैं.
तृतीया श्रेणी के पढाई में कमजोर छात्र – परतुं कारस्तानी में उच्च पदक विजेता – राजनीति में हाथ आजमा कर पार जाते हैं व उपरोक्त वर्णित दोनों श्रेणियों को संचालित करते हैं........
एक और तबका भी होता है – विद्यालआय में – पढाई में बिलकुल ही फ़ैल किस्म के योधा ... जो पढाई को तुच्छ विद्या जानकर मात्र बदमाशी में ही सर खपाते हैं – व गुरुजनों और सहपाठियों के सर फोड़ते हैं....... ये तबका उपरोक्त सभी श्रेणियों पर राज करते हैं..........

ऐसा देश है मेरा.......... 
क्या ख्याल है ?
हैं न अपना विविधतापूर्ण देश.............


जय राम जी की