26.10.10

सच इस महंगाई में तो पतिव्रता नारी बनना भी कित्ता मुश्किल है....

Photo courtsey : www.getwallpaper.net


ऐसा देश है मेरा, जहाँ एक दिन पहले ६० रूपये की मेहँदी हाथों पर लग रही थी..... कल २५० रूपये लिए जा रहे थे.... नारियल .... १० रूपये वाला ३० रूपये का मिल रहा था... पार्किंग में जगह नहीं थी....... फैनी ८० रूपये से बढकर २०० रूपये किलो के भाव थी........
.        कई तरह के मोटे-पतले, दुबले, गोरे-काले से लड़के सड़क के किनारे बैठ कर मेहँदी लगा रहे थे. पतिदेव (खासकर नए-नए पति बने है) इर्ष्या नज़र से अपनी पत्नी का हाथ उस मेहँदी लगवाने वाले हाथों से देख रहे थे........ साला पैसे भी लेता है और देखो ..... कैसे हाथ को पकड़ कर गोद में रख कर मेहँदी लगा रह है.
.        देखो, इस बार में इन लड़कियों से मेहँदी नहीं लगावायुंगी ..... लड़के लोग ही सही मेहँदी लगाते हैं श्रीमती पिछले अनुभव सुनाने लग गई और हम तुनुक कर एक मोटी आंटी के सामने उसे बिठा देते हैं ... क्या है की अपन में "इर्ष्या" तो लेश मात्र भी नहीं है.
..        गुब्बारे बेचने वाले को सुरक्षाकर्मी गिरबान से पकड कर मार्किट से बाहर घसीटता हुवा ले जा रहा था..... एक भिखारी को २ रूपये का सिक्का दिया ........... बुरा सा मुँह बनाकर मन ही मन गाली देता हुवा चला गया.......... तम्बाकू की पुडिया न जेब में थी और नहीं ही उस सुगन्धित मार्केट में उपलब्ध हो रही थी.... तुनक और बढती जा रही थी. ..... एक साहेब हथेली पर BBC (बुधिवर्धक चूर्ण = सुरती का नामकरण सलील वर्मा जी का कोपी राईट है) घिसते हुवे नज़र आये तो .... उन्ही से दोस्ती गांठ ली....
..        एक साहेब बीवी से उलझे दिखे......... इत्ती भीड़-भाड़ है .... ३-४ दिन पहले नहीं मेहँदी नहीं लगवा सकती थी.... एक की जगह १० मांग रहे है और टाइम और खोटी हो रहा है.. शराब सर पर चढ़ कर कर सच उगल रही थी.... पर बीवी आँखे दिखा रही थी.... अंतत शराब जीतती दीख रही थी...
सच इस महंगाई में तो पतिव्रता नारी बनना भी कित्ता मुश्किल है.... 

जाते जाते ......
संता सिंह जब घर पहुंचा तो बीवी ने पूजा की तैयारी कर रखी थी.... घर का वातावरण बहुत आलौकिक लग रहा था..
मैं क्यया भागवान ऐ की कर रही है...
कुज नई, तुवाडा ही स्यापा कर रही हाँ.......


और हाँ, अभी एक मित्र का SMS आया है, बिलकुल सटीक बैठ रहा है इस मौके पर :
लक्ष्मी जी का वाहन, उल्लू एक बार नाराज़ हो गया.... बोला ... ये माता, आपकी पूजा दुनिया करती है पर मुझे कोई नहीं पूजता..
इस पर माता बोली... परेशान मत हो.... आज तुने शिकायत की है तो ठीक है. अब मेरी पूजा से ठीक ११ दिन पहले तेरी भी पूजा होगी.. और इसी प्रकार उस दिन को "करवाचौथ" कहा जाने लगा.

बहरहाल, जय राम जी की 

19 टिप्‍पणियां:

  1. MEHNGAI CHAHE JITNI KYO NA HO..

    JO NARI SRINGAR KI VASTU HAI WO TO LENI HI HAI...

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  2. हा हा ... आज करवाचौथ के दिन का महत्व पता चल गया ....

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  3. . और इसी प्रकार उस दिन को "करवाचौथ" कहा जाने लगा.


    badiya baba.....

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  4. यह सही बताया दीपक बाबा ...आज सावधान रहना :-)

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  5. सच इस महंगाई में तो पतिव्रता नारी बनना भी कित्ता मुश्किल है....

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  6. संता सिंह जब घर पहुंचा तो बीवी ने पूजा की तैयारी कर रखी थी.... घर का वातावरण बहुत आलौकिक लग रहा था..
    मैं क्यया भागवान ऐ की कर रही है...
    कुज नई, तुवाडा ही स्यापा कर रही हाँ.......

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  7. ऐसा देश है मेरा, जहाँ एक दिन पहले ६० रूपये की मेहँदी हाथों पर लग रही थी..... कल २५० रूपये लिए जा रहे थे.... नारियल .... १० रूपये वाला ३० रूपये का मिल रहा था... पार्किंग में जगह नहीं थी....... फैनी ८० रूपये से बढकर २०० रूपये किलो के भाव थी........

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  8. गुब्बारे बेचने वाले को सुरक्षाकर्मी गिरबान से पकड कर मार्किट से बाहर घसीटता हुवा ले जा रहा था..... एक भिखारी को २ रूपये का सिक्का दिया ........... बुरा सा मुँह बनाकर मन ही मन गाली देता हुवा चला गया.......... तम्बाकू की पुडिया न जेब में थी और नहीं ही उस सुगन्धित मार्केट में उपलब्ध हो रही थी.... तुनक और बढती जा रही थी. ..... एक साहेब हथेली पर BBC (बुधिवर्धक चूर्ण = सुरती का नामकरण सलील वर्मा जी का कोपी राईट है) घिसते हुवे नज़र आये तो .... उन्ही से दोस्ती गांठ ली....

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  9. एक साहेब बीवी से उलझे दिखे......... इत्ती भीड़-भाड़ है .... ३-४ दिन पहले नहीं मेहँदी नहीं लगवा सकती थी.... एक की जगह १० मांग रहे है और टाइम और खोटी हो रहा है.. शराब सर पर चढ़ कर कर सच उगल रही थी.... पर बीवी आँखे दिखा रही थी.... अंतत शराब जीतती दीख रही थी...

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  10. और हाँ, अभी एक मित्र का SMS आया है, बिलकुल सटीक बैठ रहा है इस मौके पर :
    लक्ष्मी जी का वाहन, उल्लू एक बार नाराज़ हो गया.... बोला ... ये माता, आपकी पूजा दुनिया करती है पर मुझे कोई नहीं पूजता..
    इस पर माता बोली... परेशान मत हो.... आज तुने शिकायत की है तो ठीक है. अब मेरी पूजा से ठीक ११ दिन पहले तेरी भी पूजा होगी.. और इसी प्रकार उस दिन को "करवाचौथ" कहा जाने लगा.

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  11. दीपक बाबू (ये आपने ख़ामख़्वाह अपने नाम में बाबा लगा लिया है, दीपक बाबा लिखने से असम्म्मान झलकने लगता है.. हमको तो बाबू ठीक लगता है)हमारे बिहार में करवा चौथ के जगह हरितालिका तीज मनाया जाता है... अतः हम तो उस 11 दिन पहले के अनुष्ठान से मुक्त हो गये हैं...आपने अच्छा चित्र खींचा है...और बेचारा संता..

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  12. फ़ुल फ़ार्म में हो बॉस आज तो।
    अभी सलिल जी के कमेंट से पता चला कि फ़त्तू और संता एक ही हैं, वाकई सच है।
    मेरी नजर में इस ब्लॉग की आज तक की सबसे चुटीली पोस्ट।
    शुभकामनायें।

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  13. एक पुरुषविरोधी टिप्पणी: लड़कों को मेंहदी लगाने का धन्धा बन्द कर देना चाहिए। :)

    मज़ा आ गया। हमलोग हॉस्टल में BBC को CC कहते थे - चैतन्यचूर्ण

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  14. हमारी तो बेटी ही लगा देती है मेहंदी ...ना सिर्फ हमारे , समय हो तो पड़ोसी आंटियों , भाभियों और दीदियों को भी ...इसलिए किसी को किसी से ईर्ष्या करने की जरुरत नहीं पड़ती
    और बाकी आडम्बर करते नहीं है ...
    इसलिए हमें ये त्यौहार महंगा पड़ता नहीं है ...!

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  15. बात तो सही कही है .महंगे हर जगह सर चढ कर बोल रही है तो करवा चौथ क्यों अछूता रहे.

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  16. @ सतीश जी, हम तो दस साल से यूँ ही लापरवाही में चल रहे हैं.
    @मिश्र जी, आप का साथ ही तो यहाँ बचाए रखे है.... वरना बाबा तो अपनी मस्ती में मस्त थे.
    @सलील जी, बाबू शब्द में कुछ जिम्मेवारी वाला दबाव महसूस होता है और बाबा - एक लापरवाह व्यक्तित्व को उज्जागर करता है. बाकी आपका प्यार है बाबू भी सर माथे.
    @संजय जी, भाई आपके फत्तू को ही हमने संता बना रखा है - सही पहचाने.
    @गिरिजेश जी, सही मायने में आपने सुरती को उसके उचित स्थान पर पहुंचाया है "चैतन्यचूर्ण"
    @वाणी जी, बढिया है, बाकी हमने भी कह दिया.... अगली बार सब ठीक रहा तो मेहँदी हम खुद ही घर में लगाएंगे.
    @शिखा जी, आडम्बर ही महगाई को बढ़ाते हैं.

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  17. वाह वाह जी वाह...एक उल्लू के लिए इतना तामझाम...इतना शोर शराबा...इतनी माथा पच्ची...हे भगवान हमारे देश की महिलाएं कब सुधरेंगी???? उस दिन मेहदी न लगे तो उन्हें लगता है ये शाख पे बैठा उल्लू कहीं और उड़ जाएगा...हा हा हा हा हा...बहुत रोचक पोस्ट...

    नीरज

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  18. @नीरज जी, जब लक्ष्मी जी का वाहन ही उल्लू है तो - उसके लिए इत्ता तामझाम और शोरशराबा होना ही चाहिय न......
    और रही शाख पर उल्लू बैठने की बात - तो कहाँ जाएगा.... तोहरी अटरिया से उड़ उकी मुडेर बैठ जाएगा.

    बढिया.

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बक बक को समय देने के लिए आभार.
मार्गदर्शन और उत्साह बनाने के लिए टिप्पणी बॉक्स हाज़िर है.